Edited By Desh Raj, Updated: 04 Mar, 2026 06:31 PM

ग्वालियर जिला से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां SI नियुक्ति आदेश की अवहेलना करने पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस मामले में ADGP को अवमानना नोटिस जारी किया गया है। दरअसल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम मामले में यह सख्त रुख...
(ग्वालियर): ग्वालियर जिला से एक बड़ा मामला सामने आया है। यहां SI नियुक्ति आदेश की अवहेलना करने पर हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई है। इस मामले में ADGP को अवमानना नोटिस जारी किया गया है। दरअसल मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम मामले में यह सख्त रुख अख्तियार किया है। कोर्ट ने प्लाटून कमांडर को सब इंस्पेक्टर पद पर नियुक्ति नहीं देने पर एडीजीपी पुलिस मुख्यालय भोपाल को अवमानना नोटिस जारी किया है।
प्लाटून कमांडर के पद पर कार्यरत पीयूष शर्मा से जुड़ा है मामला
दरअसल ये पूरा मामला प्लाटून कमांडर के पद पर कार्यरत पीयूष शर्मा से जुड़ा हुआ है। जानकारी के मुताबिक हाई कोर्ट ने दिसंबर 2025 को उनकी याचिका मंजूर की थी। याचिका को मंजूर करते हुए हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि पीयूष शर्मा को एसआइ पद पर नियुक्त किया जाए। वहीं इस आदेश के विरोध में सरकार की ओर से भी कोई अपील दायर नहीं की गई।बावजूद इसके शर्मा को नियुक्ति पत्र जारी नहीं किया गया।
साल 2010 में पीयूष शर्मा के खिलाफ हुआ था मारपीट का मामला दर्ज
आपको बता दें कि वर्ष 2010 में थाना बहोड़ापुर में पीयूष शर्मा के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज हुआ था। लेकिन अगस्त 2013 को अदालत ने उन्हें बरी कर दिया। इसके बाद ही उन्होंने पुलिस भर्ती परीक्षा दी और 13 नवंबर 2017 को प्लाटून कमांडर के पद पर चयनित हुए। यही नहीं फिर उन्होंने एसआइ (SI) की परीक्षा भी पास कर ली।
2018 में घोषित परिणाम में उनका चयन एसआइ पद के लिए हुआ लेकिन नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ। कोर्ट के साफ आदेश के बाद भी जब नियुक्ति पत्र जारी नहीं हुआ तो उन्होंने साल 2021 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की।
पीयूष शर्मा को पुराने आपराधिक मामले का हवाला देकर अयोग्य बताया, लेकिन कोर्ट ने दिसंबर 2025 को उनके पक्ष में फैसला सुनाकर नियुक्ति देने का आदेश दिया। लेकिन एडीजीपी गोपाल सिंह धाकड़ ने नया आदेश जारी कर उन्हें एसआइ पद के लिए अनुपयुक्त घोषित कर दिया। कोर्ट ने कहा कि जब सिंगल बेंच के आदेश को चुनौती नहीं दी गई, तो संबंधित अधिकारी ने नियुक्ति पत्र क्यों जारी नहीं किया।
लिहाजा कोर्ट ने माना कि एडीजीपी का आदेश न्यायालय की अवमानना के दायरे में आता है। इसलिए अब एडीजीपी को नोटिस का जवाब देना होगा। मामले की सुनवाई 17 मार्च को होगी।