इंदौर हनी ट्रैप मामले में बहुत बड़ी कामयाबी,सागर से रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी दबोची,BJP में रह चुकी पदाधिकारी, श्वेता जैन का बड़ा यू-टर्न

Edited By Desh Raj, Updated: 21 May, 2026 04:46 PM

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इंदौर के बहुचर्चित शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर हनी ट्रैप मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सफेदपोशों और इस धंधे के सिंडिकेट से जुड़े चौंकाने वाले चेहरे बेनकाब हो रहे हैं।

इंदौर (सचिन बहरानी): इंदौर के बहुचर्चित शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह उर्फ चिंटू ठाकुर हनी ट्रैप मामले में इंदौर क्राइम ब्रांच की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे सफेदपोशों और इस धंधे के सिंडिकेट से जुड़े चौंकाने वाले चेहरे बेनकाब हो रहे हैं। पुलिस ने इस मामले में अलका दीक्षित और श्वेता विजय जैन के बाद अब सागर से रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को हिरासत में ले लिया है।

मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन ने खुद सरकारी गवाह बनने की पेशकश की

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मामले में सनसनीखेज मोड़ तब आया, जब इस पूरे रैकेट की मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन ने पुलिस के सामने खुद सरकारी गवाह बनने की पेशकश कर दी है। दूसरी तरफ, खाकी की साख पर बट्टा लगाने वाले पुलिसकर्मी विनोद शर्मा की भूमिका की भी बारीकी से जांच की जा रही है।

रेशू पूर्व में भाजपा के एक प्रकोष्ठ में रह चुकी है  पदाधिकारी

दरअसल इंदौर को झकझोर देने वाले इस हनी ट्रैप कांड और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क के तार अब मध्य प्रदेश के अन्य जिलों से भी जुड़ने लगे हैं। क्राइम ब्रांच की टीम ने इस पूरे नेक्सस की एक और मजबूत कड़ी रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को सागर से राउंडअप किया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, रेशू पूर्व में भाजपा के एक प्रकोष्ठ में पदाधिकारी भी रह चुकी है। जांच में सामने आया है कि रेशू ने ही श्वेता विजय जैन के माध्यम से इंदौर की महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित से संपर्क साधा था। इसके बाद इन तीनों ने मिलकर समाज के रसूखदार और प्रभावशाली लोगों को हुस्न के जाल में फंसाकर करोड़ों रुपये की वसूली का एक  ब्लैकमेलिंग नेटवर्क तैयार किया।

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इससे पहले क्राइम ब्रांच इस मामले में मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन, महिला शराब तस्कर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप और प्रॉपर्टी कारोबारी लाखन चौधरी को सलाखों के पीछे भेज चुकी है। लेकिन अब इस मामले में कानूनी तौर पर भूचाल आना तय है, क्योंकि मास्टरमाइंड श्वेता विजय जैन ने पुलिस के सामने सरकारी गवाह बनने की इच्छा जाहिर की है। अगर कोर्ट इसे मंजूरी देता है, तो कई बड़े नामों का बेनकाब होना तय माना जा रहा है। वहीं, इस सिंडिकेट को बैक सपोर्ट देने के आरोप में पुलिसकर्मी विनोद शर्मा के खिलाफ भी विभागीय और कानूनी जांच का शिकंजा कसता जा रहा है।

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