15 अगस्त पर जनता के सामने होगा विकास का रिपोर्ट कार्ड, CM मोहन यादव के बड़े निर्देश

Edited By Vikas Tiwari, Updated: 22 Jun, 2026 06:54 PM

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक में कई अहम निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों...

भोपाल: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने योजना, आर्थिक एवं सांख्यिकी विभाग की समीक्षा बैठक में कई अहम निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा है कि स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर जिला मुख्यालयों में आयोजित कार्यक्रमों में प्रभारी मंत्री अपने-अपने जिलों में हुए विकास कार्यों और जनकल्याणकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी जनता के सामने प्रस्तुत करेंगे। इसके लिए समारोह स्थलों पर विशेष प्रदर्शनियां भी लगाई जाएंगी, ताकि लोग विकास कार्यों को सीधे देख और समझ सकें।

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह पहल विकास कार्यों के एक तरह के सोशल ऑडिट के रूप में काम करेगी, जिससे शासन की योजनाओं और उपलब्धियों की पारदर्शी जानकारी आम जनता तक पहुंचेगी। बैठक में मुख्यमंत्री ने जिला विकास समितियों की भूमिका को और मजबूत बनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि समितियां विकास गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाएं और निजी निवेश को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयास करें। डॉ. यादव ने विधानसभा क्षेत्र विकास योजना के तहत सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाने की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही किफायती आवासों के निर्माण में ईको-फ्रेंडली भवन निर्माण सामग्री के उपयोग को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने राज्य के सभी विभागों, संभागों और जिलों के सांख्यिकीय आंकड़ों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, जिससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ सके।

विश्राम घाट पर ही बने मृत्यु प्रमाण पत्र
बैठक में जन्म और मृत्यु पंजीकरण व्यवस्था की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि विश्राम घाटों पर ही मृत्यु पंजीयन की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कार्ययोजना तैयार की जाए। इससे ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के लोगों को मृत्यु प्रमाण पत्र प्राप्त करने में आसानी होगी।

जिलों के लिए अलग-अलग विकास सूचकांक
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी जिलों के विकास सूचकांक उनकी स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तय किए जाएं। कृषि प्रधान, औद्योगिक और वन संपन्न जिलों के लिए अलग-अलग विकास मानक निर्धारित किए जाने चाहिए। इसके अलावा प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, ग्रामीण क्षेत्रों में मकान निर्माण के लिए तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने और पर्यावरण अनुकूल निर्माण सामग्री के उपयोग को प्रोत्साहित करने के निर्देश भी दिए गए। बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री सामुदायिक नेतृत्व क्षमता विकास कार्यक्रम के तहत अब तक 1.37 लाख से अधिक छात्र लाभान्वित हो चुके हैं। वहीं जल गंगा संवर्धन अभियान में प्रस्फुटन और नवांकुर समितियों ने जल संरक्षण गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी निभाई है। विमुक्त, घुमंतु और अर्द्धघुमंतु परिवारों के चिन्हांकन अभियान के तहत अब तक 25 हजार से अधिक परिवारों का पंजीयन किया जा चुका है।

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