भाई लाचार, बहन मजबूर! स्ट्रेचर नहीं मिला तो पीठ पर उठाकर वार्ड तक ले गई, MP में अस्पताल की व्यवस्था पर सवाल

Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Oct, 2026 01:42 PM

sister carries disabled brother on her back after stretcher not found

जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा एक दिव्यांग मरीज उस समय व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक बन गया, जब उसे वार्ड तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका।

गुना। जिला अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचा एक दिव्यांग मरीज उस समय व्यवस्था की बदहाली का प्रतीक बन गया, जब उसे वार्ड तक पहुंचाने के लिए स्ट्रेचर उपलब्ध नहीं हो सका। मजबूरी में उसकी बहन ने ही भाई को अपनी पीठ पर बैठाया और अस्पताल के वार्ड तक लेकर पहुंची। इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार राघौगढ़ क्षेत्र की रहने वाली कृष्णाबाई अपने भाई जगदीश को इलाज के लिए जिला अस्पताल लेकर पहुंची थी। जगदीश लंबे समय से बीमारी से जूझ रहा है और दिव्यांग होने के कारण वह सामान्य रूप से चलने-फिरने में सक्षम नहीं है। अस्पताल पहुंचने के बाद उसे वार्ड तक ले जाने के लिए परिजन को स्ट्रेचर की जरूरत थी।

कृष्णाबाई का कहना है कि काफी तलाश के बावजूद उन्हें तत्काल स्ट्रेचर नहीं मिला। अस्पताल में मौजूद कर्मचारियों से मदद की उम्मीद भी पूरी नहीं हुई। आखिरकार भाई को वार्ड तक ले जाने की जिम्मेदारी बहन ने खुद उठाई। उसने जगदीश को अपनी पीठ पर बैठाया और धीरे-धीरे वार्ड की ओर बढ़ गई।

यह तस्वीर इसलिए भी झकझोरने वाली है क्योंकि अस्पताल में आने वाले मरीजों में कई ऐसे होते हैं जो चलने की स्थिति में नहीं होते। उनके लिए स्ट्रेचर या व्हीलचेयर जैसी मूलभूत सुविधाएं बेहद जरूरी होती हैं। ऐसे में किसी परिजन को मरीज को खुद उठाकर ले जाना पड़े तो यह अस्पताल की व्यवस्था पर स्वाभाविक सवाल खड़े करता है।

हालांकि अस्पताल प्रबंधन ने स्ट्रेचर की कमी के आरोपों से इनकार किया है। प्रभारी सिविल सर्जन डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर के मुताबिक अस्पताल में पर्याप्त संख्या में स्ट्रेचर उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि क्रिटिकल केयर ब्लॉक के साथ पुराने अस्पताल परिसर में भी स्ट्रेचर रखे जाते हैं। इसके अलावा मरीजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए वार्ड बॉय और मल्टी-यूटिलिटी कर्मचारियों की ड्यूटी भी निर्धारित है।

प्रभारी सिविल सर्जन का कहना है कि कई बार मरीजों के परिजन जल्दबाजी में कर्मचारियों का इंतजार किए बिना खुद ही मरीज को उठाकर ले जाने लगते हैं। ऐसे मामलों में यह जरूरी है कि मरीज के अटेंडेंट अस्पताल स्टाफ से सहायता लें।

फिलहाल, कृष्णाबाई द्वारा अपने दिव्यांग भाई को पीठ पर लेकर वार्ड तक पहुंचाने की तस्वीर ने अस्पताल की व्यवस्थाओं और मरीजों के प्रति संवेदनशीलता को लेकर बहस छेड़ दी है। प्रबंधन की ओर से सुविधाएं उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है, लेकिन सवाल यही है कि अगर स्ट्रेचर मौजूद हैं तो जरूरत के वक्त मरीज तक वे क्यों नहीं पहुंच पाए ?

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