Edited By Vandana Khosla, Updated: 16 Oct, 2026 01:46 PM

CG desk: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में शारदीय नवरात्र के पंचमी के अवसर पर गुरुवार शाम आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में 102 परिवारों की सनातन धर्म में‘घर वापसी'कराए जाने का दावा किया गया है। जैजैपुर विकासखंड के गलगलाडीह में श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान...
CG desk: छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में शारदीय नवरात्र के पंचमी के अवसर पर गुरुवार शाम आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में 102 परिवारों की सनातन धर्म में‘घर वापसी'कराए जाने का दावा किया गया है। जैजैपुर विकासखंड के गलगलाडीह में श्रीमद् देवी भागवत कथा के दौरान आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं अखिल भारतीय घर वापसी अभियान के प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने परिवारों के सदस्यों के चरण पखारकर उनका स्वागत किया।
मिली जानकारी के अनुसार, नवरात्र के अवसर पर फाउंडेशन एवं दिलीप सिंह जूदेव फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम में विधि-विधान से 102 परिवारों को सनातन परंपरा से पुन: जोड़ा गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएं, श्रद्धालु, जनप्रतिनिधि और स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जूदेव ने सक्ती जिले में कथित धर्मांतरण की गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि सेवा के नाम पर लोगों को प्रलोभन देकर उनकी धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान बदलने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने समाज से ऐसी गतिविधियों के प्रति सतर्क रहने और अपनी परंपराओं के संरक्षण के लिए संगठित होने का आह्वान किया।
जूदेव ने कहा कि सेवा के नाम पर सौदा करके धर्मांतरण कराना मानवता के साथ विश्वासघात और हमारी संस्कृति को मिटाने की साजिश है। सनातन भारत की आत्मा है और इसकी अस्मिता पर किसी भी प्रकार का प्रहार स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए सामाजिक जागरूकता, संगठन और द्दढ़ संकल्प आवश्यक हैं। उन्होंने लोगों से छद्म हिंदुओं और भ्रामक ताकतों से सावधान रहने की अपील भी की। अपने संबोधन में जूदेव ने अपने पिता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री दिवंगत कुमार दिलीप सिंह जूदेव के घर वापसी अभियान से जुड़े कार्यों और संकल्पों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अपनी संस्कृति, परंपराओं और मूल आस्था से जुड़ाव किसी भी समाज की पहचान का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने कहा कि समाज के अंतिम व्यक्ति के अपनी मूल आस्था से पुन: जुड़ने तक यह अभियान जारी रहेगा।