Edited By Vikas Tiwari, Updated: 16 Oct, 2026 07:09 PM

मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम देखने को मिला। श्योपुर जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत 1,000 से अधिक महिलाओं और छात्राओं ने एक साथ मिलकर भारतीय मादा चीता ‘मुखी’ की विशाल प्रतिकृति तैयार की। ह्यूमन रंगोली के जरिए बनाई...
श्योपुर: मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का अनूठा संगम देखने को मिला। श्योपुर जिले में सेवा संकल्प अभियान के तहत 1,000 से अधिक महिलाओं और छात्राओं ने एक साथ मिलकर भारतीय मादा चीता ‘मुखी’ की विशाल प्रतिकृति तैयार की। ह्यूमन रंगोली के जरिए बनाई गई इस भव्य आकृति ने वन्यजीव संरक्षण और जनभागीदारी का खास संदेश दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस अनूठी पहल की सराहना करते हुए इसे प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता का प्रमाण बताया।

श्योपुर में दिखी नारी शक्ति की अनूठी तस्वीर
शुक्रवार को श्योपुर के ढेगदा स्थित क्रीड़ा परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में महिला एवं बाल विकास विभाग, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) से जुड़ी महिलाओं और कन्या आदिवासी परिसर की छात्राओं ने हिस्सा लिया। चीते के मुख के रंगों से मेल खाते परिधान पहनकर महिलाओं ने मानव श्रृंखला के माध्यम से मादा चीता ‘मुखी’ की विशाल प्रतिकृति बनाई। शारदीय नवरात्र के अवसर पर आयोजित इस पहल ने महिला शक्ति, सामूहिक एकजुटता और वन्यजीव संरक्षण के संदेश को एक साथ जोड़ा। ‘क्रिएटिव श्योपुर’ के तहत हुए इस आयोजन को सेवा संकल्प अभियान की प्रमुख गतिविधियों में शामिल किया गया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने की सराहना
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस पहल की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट चीता के चार वर्ष पूरे होने के अवसर पर 1,000 से अधिक महिलाओं और छात्राओं द्वारा ह्यूमन रंगोली के माध्यम से मादा चीता ‘मुखी’ की विशाल प्रतिकृति बनाना अद्भुत और प्रेरणादायी है। मुख्यमंत्री ने इसे वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और जनभागीदारी का प्रतीक बताते हुए लोगों से प्रकृति और वन्यजीवों के संरक्षण का संकल्प लेने की अपील की।
कौन है चीता ‘मुखी’, क्यों है खास?
भारतीय मादा चीता ‘मुखी’ का जन्म 29 मार्च 2023 को मध्यप्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में हुआ था। वह नामीबिया से भारत लाई गई मादा चीता ‘ज्वाला’ की संतान है। भारत में चीता पुनर्स्थापना के बाद देश की धरती पर जन्मी पहली चीता पीढ़ी की पहचान के रूप में ‘मुखी’ का विशेष महत्व है। नवंबर 2025 में मुखी ने पांच शावकों को जन्म दिया था। इसे भारत में चीता पुनर्स्थापना परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना गया। कूनो में चीतों की बढ़ती संख्या के साथ मध्यप्रदेश की पहचान देश के ‘चीता स्टेट’ के रूप में मजबूत हुई है।

सेवा संकल्प अभियान के तहत हो रहे आयोजन
मध्यप्रदेश में 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के अंतर्गत जनभागीदारी, सामाजिक सरोकार और जनकल्याण से जुड़ी गतिविधियां आयोजित की जा रही हैं। श्योपुर में ‘मुखी’ की विशाल ह्यूमन रंगोली इसी अभियान की ऐसी पहल बनी, जिसने महिला सहभागिता के साथ वन्यजीव संरक्षण का संदेश दिया।