Edited By meena, Updated: 14 Oct, 2026 03:06 PM

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठन भारतीय किसान संघ की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर धान खरीदी की दर...
रायपुर : छत्तीसगढ़ में आगामी धान खरीदी सत्र से पहले किसानों की विभिन्न मांगों को लेकर भारतीय किसान संघ ने राज्य सरकार के समक्ष आंदोलन की चेतावनी दी है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के आनुषंगिक संगठन भारतीय किसान संघ की प्रदेश इकाई ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को पत्र लिखकर धान खरीदी की दर 3,100 रुपये से बढ़ाकर 3,358 रुपये प्रति क्विंटल करने और लगभग 1,700 करोड़ रुपये के लंबित बोनस का भुगतान करने की मांग की है। संगठन ने यह जानकारी बुधवार मीडिया को दी। संगठन ने मांगों पर कारर्वाई नहीं होने की स्थिति में 27 अक्टूबर को मंत्रालय का घेराव करने की घोषणा की है।
भारतीय किसान संघ का कहना है कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों के दौरान धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य में कुल 258 रुपये की वृद्धि की है। इस बढ़ोतरी को राज्य में किसानों को दी जा रही धान की कीमत में शामिल किया जाना चाहिए। वर्तमान में राज्य में धान की खरीदी 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से की जा रही है, जबकि धान का मौजूदा न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये से 2,461 रुपये तक है। संगठन ने केंद्र द्वारा बढ़ाए गए 258 रुपये को जोड़कर किसानों को 3,358 रुपये प्रति क्विंटल भुगतान करने की मांग उठाई है।
संघ ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल से जुड़े धान बोनस के भुगतान का मुद्दा भी उठाया है। संगठन के अनुसार वर्ष 2022-23 की चौथी किस्त के लगभग 1,700 करोड़ रुपये अब तक किसानों को नहीं मिले हैं। संघ ने इस राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की है। धान खरीदी की व्यवस्थाओं में सुधार को लेकर भी संगठन ने कई सुझाव दिए हैं। संघ चाहता है कि प्रदेश में धान उपार्जन की अवधि 15 नवंबर से 15 फरवरी तक निर्धारित की जाए। इसके साथ ही खरीदी केंद्रों में प्रति तौल अधिकतम 40 किलो 700 ग्राम धान लेने संबंधी स्पष्ट आदेश जारी किया जाए।
किसानों को धान बेचने के लिए मिलने वाले टोकन की संख्या बढ़ाने की मांग करते हुए संगठन ने बड़े किसानों को पांच, लघु किसानों को तीन और सीमांत किसानों को दो टोकन उपलब्ध कराने का प्रस्ताव रखा है। इसके अतिरिक्त किसानों पर दबाव बनाकर खाता समर्पण कराने की प्रक्रिया पर रोक लगाने तथा टोकन वितरण व्यवस्था को अधिक सुविधाजनक बनाने की मांग की गई है। संगठन ने बाढ़ से प्रभावित किसानों की समस्याओं को भी सरकार के समक्ष रखा है।
संघ ने फसलों को हुए नुकसान का तत्काल सर्वेक्षण कर प्रभावित किसानों को क्षतिपूर्ति देने, निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर खाद बेचने वालों के विरुद्ध कारर्वाई करने और कृषि संबंधी व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है। भारतीय किसान संघ ने गोवंदन योजना लागू करने तथा जी-राम-जी योजना को गो संरक्षण एवं गो संवर्धन से जोड़ने की मांग भी की है। इसके अलावा भूमि अधिग्रहण के मामलों में भारतीय एग्रो इकोनामिक रिसर्च सेंटर के उदयपुर डिक्लेरेशन के अनुरूप कार्य करने पर जोर दिया है। जल संरक्षण और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मक्का और गेहूं की भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी सुनिश्चित करने की मांग की गई है। उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ में धान की कीमत और किसानों को बोनस का भुगतान लंबे समय से प्रमुख राजनीतिक मुद्दा रहा है।