Edited By Himansh sharma, Updated: 14 Oct, 2026 02:10 PM

मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों भाजपा के भीतर ही उठ रहे सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं।
छिंदवाड़ा। मध्य प्रदेश की सियासत में इन दिनों भाजपा के भीतर ही उठ रहे सवाल चर्चा का विषय बन गए हैं। किसानों और आम लोगों की समस्याओं को लेकर पार्टी के नेताओं के अलग-अलग रुख अब राजनीतिक बहस को हवा दे रहे हैं। छिंदवाड़ा में भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना का मामला भी कुछ ऐसा ही है, जहां जनता की समस्याओं को लेकर उनका प्रदर्शन अब पार्टी के अनुशासन के दायरे में आ गया है। दरअसल, सीहोर में आदिवासी परिवारों के घरों पर वन विभाग की कार्रवाई को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए प्रभावित लोगों के पक्ष में अपना रुख स्पष्ट किया था। शिवराज के इस कदम ने अब छिंदवाड़ा में एक नई राजनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है।
किसानों के मुद्दे पर प्रदर्शन, भाजपा ने भेजा नोटिस
छिंदवाड़ा में अमित सक्सेना किसानों की समस्याओं को लेकर सड़क पर उतरे और प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखीं। उन्होंने किसानों की परेशानियों को लेकर अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा। हालांकि, इस प्रदर्शन को लेकर भाजपा संगठन ने आपत्ति जताई और इसे अनुशासनहीनता मानते हुए उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया।
पार्टी की इस कार्रवाई के बाद अमित सक्सेना ने भी अपना पक्ष खुलकर रखा। उनका तर्क है कि जब केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान जनता के मुद्दे पर आवाज उठा सकते हैं, तो उन्हें अपने क्षेत्र के किसानों की समस्याएं उठाने से क्यों रोका जाना चाहिए? उनके मुताबिक, जनता के हितों की बात करना किसी भी जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
'सर्कस का शेर नहीं हूं, गुलामी नहीं करूंगा'
नोटिस मिलने के बाद अमित सक्सेना के तेवर और तीखे नजर आए। उन्होंने साफ कहा कि यदि जनता के लिए आवाज उठाना अनुशासनहीनता है, तो वे ऐसा बार-बार करेंगे, चाहे इसके लिए उन्हें पार्टी से निष्कासित ही क्यों न होना पड़े।
उन्होंने यह भी कहा कि वे सर्कस के शेर नहीं हैं और किसी की गुलामी करके राजनीति नहीं करेंगे। उनके इस बयान ने भाजपा के भीतर संगठनात्मक अनुशासन और जनहित के मुद्दों पर नेताओं की स्वतंत्र भूमिका को लेकर बहस तेज कर दी है।
दो साल पहले कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए थे
अमित सक्सेना का राजनीतिक सफर भी इस घटनाक्रम को दिलचस्प बनाता है। लोकसभा चुनाव के दौरान, करीब दो साल पहले, उन्होंने कांग्रेस छोड़कर भाजपा का दामन थामा था। अब किसानों के सवाल पर प्रदर्शन करते हुए उन्होंने कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ की तारीफ भी की है। उनके इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं।
शिवराज का असर या सियासत में नया मोड़?
इस पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या अमित सक्सेना वास्तव में शिवराज सिंह चौहान के रुख को अपना उदाहरण मानकर जनता के मुद्दे उठा रहे हैं, या फिर उनके इस कदम के पीछे कोई बड़ा राजनीतिक संदेश छिपा है? कांग्रेस से भाजपा में आए नेता का अब पार्टी के सिस्टम पर सवाल उठाना और कमलनाथ की तारीफ करना भी चर्चा का विषय बन गया है। फिलहाल, अमित सक्सेना का प्रदर्शन और उसके बाद मिला नोटिस छिंदवाड़ा की राजनीति में सुर्खियां बटोर रहा है। अब देखना होगा कि पार्टी और नेता के बीच यह मामला आगे क्या मोड़ लेता है।