Edited By Himansh sharma, Updated: 09 Oct, 2026 08:24 PM

मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है।
भोपाल: मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को लेकर सियासत एक बार फिर गरमा गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कमलनाथ ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा है। सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कमलनाथ ने भाजपा पर ओबीसी विरोधी होने का आरोप लगाया और कहा कि प्रदेश में ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की लड़ाई हर स्तर पर लड़ी जाएगी। कमलनाथ ने अपने पोस्ट में लिखा कि भाजपा का ओबीसी विरोधी चेहरा अब पूरी तरह प्रदेश के सामने आ चुका है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में उनके मुख्यमंत्री कार्यकाल के दौरान कांग्रेस सरकार ने देश के अन्य राज्यों की तरह मध्यप्रदेश में भी ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला किया था।
कमजोर पैरवी को लेकर भाजपा पर लगाए आरोप
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें शुरू से ही ओबीसी आरक्षण को समाप्त करने का षड्यंत्र कर रही थीं। उनके मुताबिक, सरकार की कमजोर पैरवी और अदालत के सामने आधी-अधूरी जानकारी पेश किए जाने के कारण हाईकोर्ट ने ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण को रद्द कर दिया।
पूर्व मुख्यमंत्री ने भाजपा पर अदालत में कमजोर पक्ष रखने का आरोप लगाते हुए कहा कि इससे ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय हुआ है। उन्होंने दावा किया कि अदालत का आदेश दर्शाता है कि भाजपा सरकार अपने तर्कों से न्यायालय को संतुष्ट नहीं कर पाई।
'ओबीसी वर्ग के साथ अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे'
कमलनाथ ने अपने बयान में भाजपा पर आरक्षण के मुद्दे पर दोहरी रणनीति अपनाने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि भाजपा शुरू से ही आरक्षण के खिलाफ रही है और वह खुद आरक्षण समाप्त करने के बजाय अदालत के माध्यम से ऐसा करवाने की कोशिश कर रही थी।
कमलनाथ ने भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि ओबीसी वर्ग के साथ इस तरह का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि कांग्रेस हर स्तर पर ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिलाने की लड़ाई लड़ेगी।
ओबीसी आरक्षण के मुद्दे पर कमलनाथ के इस बयान के बाद मध्यप्रदेश की राजनीति में बहस तेज होने के आसार हैं। अब इस मामले में भाजपा की प्रतिक्रिया और आरक्षण से जुड़े न्यायिक घटनाक्रम पर सबकी नजर रहेगी।