Edited By Himansh sharma, Updated: 07 Oct, 2026 12:20 PM

मध्यप्रदेश सरकार के एक बार फिर बाजार से कर्ज लेने के फैसले को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है।
भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार के एक बार फिर बाजार से कर्ज लेने के फैसले को लेकर प्रदेश की सियासत गरमा गई है। राज्य सरकार अपनी वित्तीय जरूरतों और पूंजीगत खर्च को पूरा करने के लिए करीब 3000 करोड़ रुपये का नया कर्ज लेने जा रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे को लेकर बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्ज का बोझ बढ़ा रही है, लेकिन इसका असर विकास और रोजगार के मोर्चे पर दिखाई नहीं दे रहा।
जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर सरकार को घेरते हुए कहा कि मध्यप्रदेश सरकार फिर 3000 करोड़ रुपये का कर्ज लेने जा रही है। उन्होंने सरकार के उस तर्क पर भी सवाल उठाया, जिसमें कहा जाता है कि कर्ज की राशि पूंजीगत खर्च के लिए इस्तेमाल की जा रही है। पटवारी ने सवाल उठाया कि यदि लगातार कर्ज बढ़ रहा है तो प्रदेश में विकास की गति और रोजगार के अवसर कहां हैं?
अलग-अलग अवधि के लिए लिया जाएगा कर्ज
जानकारी के मुताबिक, राज्य सरकार वित्तीय संस्थाओं के जरिए करीब 3000 करोड़ रुपये जुटाने की प्रक्रिया में है। इसके लिए 1000-1000 करोड़ रुपये की तीन अलग-अलग किश्तों में कर्ज लिया जाएगा। तीनों ऋण अलग-अलग अवधि के होंगे। कर्ज लेने की प्रक्रिया भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से पूरी की जाएगी।
इसके लिए वित्तीय संस्थाओं से प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं। तय प्रक्रिया के तहत सबसे कम ब्याज दर पर कर्ज उपलब्ध कराने वाली संस्थाओं का चयन किया जाएगा। संबंधित बोली प्रक्रिया के जरिए सरकार यह राशि जुटाएगी।
हाल में भी लिया गया था 3600 करोड़ का कर्ज
मध्यप्रदेश सरकार इससे पहले भी हाल ही में करीब 3600 करोड़ रुपये का कर्ज ले चुकी है। सरकार के लगातार कर्ज लेने को लेकर कांग्रेस पहले भी सवाल उठाती रही है। विपक्ष का आरोप है कि राज्य पर कर्ज का भार बढ़ रहा है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए।
वहीं, बीजेपी और प्रदेश सरकार की ओर से लगातार यह कहा जाता रहा है कि राज्य सरकार निर्धारित वित्तीय सीमाओं के भीतर ही कर्ज ले रही है। सरकार का तर्क है कि पूंजीगत व्यय और विकास से जुड़े कार्यों के लिए ऋण लिया जा रहा है।
पटवारी ने लगाए करप्शन-कमीशन के आरोप
जीतू पटवारी ने अपने बयान में सरकार पर भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी के भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि कर्ज के नाम पर सरकार प्रदेश के भविष्य को गिरवी रखने का काम कर रही है। कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि कर्ज लेने की आड़ में सरकार का ‘करप्शन और कमीशन’ का मिशन चल रहा है।
कर्ज को लेकर कांग्रेस और बीजेपी के बीच यह राजनीतिक टकराव ऐसे समय में सामने आया है, जब राज्य सरकार विकास योजनाओं और पूंजीगत परियोजनाओं पर खर्च बढ़ाने की बात कर रही है। अब देखना होगा कि 3000 करोड़ रुपये के इस नए कर्ज को लेकर सरकार और विपक्ष के बीच सियासी बहस आने वाले दिनों में किस दिशा में जाती है।