Edited By Himansh sharma, Updated: 08 Oct, 2026 03:24 PM

मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अब उज्जैन से अयोध्या तक पैदल यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं।
भोपाल। मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह अब उज्जैन से अयोध्या तक पैदल यात्रा पर निकलने की तैयारी में हैं। उन्होंने इस यात्रा को ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ नाम दिया है। विजयादशमी के दिन 20 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह यात्रा करीब तीन महीने चलेगी और इस दौरान दिग्विजय सिंह 900 किलोमीटर से अधिक की दूरी पैदल तय करेंगे। यात्रा की शुरुआत उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना के बाद होगी। इसके बाद अलग-अलग पड़ावों से होते हुए यात्रा अयोध्या पहुंचेगी, जहां रामलला के दर्शन के साथ इसका समापन किया जाएगा।
कांग्रेस के झंडे से दूरी
यात्रा को लेकर आयोजित पत्रकार वार्ता में दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि इसका कांग्रेस पार्टी के कार्यक्रम के तौर पर आयोजन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान कांग्रेस का झंडा इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके बजाय पांच अलग-अलग रंगों की ध्वजाएं यात्रा में शामिल रहेंगी। दिग्विजय सिंह ने इसे अपनी धार्मिक आस्था और सनातन परंपरा से जुड़ा व्यक्तिगत अभियान बताया। प्रेस वार्ता में उनकी पत्नी के साथ कांग्रेस के कुछ वरिष्ठ नेता भी मौजूद रहे।
मैं सनातनी हूं, फिर कभी ईसाई तो कभी मुस्लिम क्यों बनाया जाता है?
पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिग्विजय सिंह ने अपने ऊपर लगने वाले राजनीतिक आरोपों को लेकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि वह सनातनी हैं, लेकिन राजनीतिक विरोध के चलते उन्हें कभी ईसाई तो कभी मुस्लिम बताने की कोशिश की जाती है। उन्होंने भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके मुख्यमंत्री रहने के दौरान जो लोग सम्मान के साथ उनके पैर छूने आया करते थे, वही लोग अब उन पर तरह-तरह के आरोप लगा रहे हैं।
पहले भी कर चुके हैं लंबी धार्मिक यात्रा
दिग्विजय सिंह का धार्मिक यात्रा से जुड़ाव नया नहीं है। वर्ष 2017 में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ नर्मदा परिक्रमा की थी। उस यात्रा की शुरुआत भी विजयादशमी के अवसर पर हुई थी। अब करीब नौ साल बाद दिग्विजय सिंह एक बार फिर लंबी पदयात्रा पर निकलने जा रहे हैं। उज्जैन के महाकाल से अयोध्या के रामलला तक प्रस्तावित यह यात्रा उनके राजनीतिक और धार्मिक जीवन के बीच एक अलग संदेश के तौर पर भी देखी जा रही है।