Edited By Desh Raj, Updated: 18 Mar, 2026 07:42 PM

मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो न सिर्फ रुह को कंपाने वाली है बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही भी दर्शाती है। इस लापरवाही से किसी की जान भी जा सकती थी। दरअसल जिला अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से हड़कंप है।
गुना (मिसबाह नूर): मध्य प्रदेश के गुना जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है जो न सिर्फ रुह को कंपाने वाली है बल्कि सिस्टम की घोर लापरवाही भी दर्शाती है। इस लापरवाही से किसी की जान भी जा सकती थी। दरअसल जिला अस्पताल प्रबंधन की इस लापरवाही से हड़कंप है। यहाँ एक 20 वर्षीय जीवित युवक को चिकित्सकों ने मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। युवक को अचानक होश आ गया और वह पोस्टमार्टम कक्ष से नग्न अवस्था में ही भाग निकला।
चिकित्सकों ने मृत घोषित कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया
हड्डीमील क्षेत्र के रहने वाले जॉन पारदी ने अस्पताल प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि मानसिक प्रताड़ना के चलते उसने बीते 11 मार्च को जहरीले पदार्थ सल्फास का सेवन कर लिया था। इसके बाद स्थानीय लोगों ने उसे अचेत अवस्था में जिला अस्पताल में भर्ती कराया था, लेकिन वहां मौजूद चिकित्सकों ने उसे मृत मान लिया और बिना पूरी जांच किए शव को पोस्टमार्टम हाउस भिजवा दिया।
पोस्टमार्टम रुम में युवक को आभास हुआ कि जीवित है, बिना कपड़ों के ही बाहर भागा
जॉन पारदी ने दावा किया है जब उसे होश आया तो वह खुद को पोस्टमार्टम रूम के भीतर नग्न अवस्था में पाकर स्तब्ध रह गया। उसे तुरंत आभास हुआ कि वह जीवित है और वहां से बिना कपड़ों के ही बाहर की ओर भागा। इस दौरान अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और कुछ समय बाद उसके परिजन भी वहां पहुंच गए।
इस घटना ने अस्पताल की संवेदनशीलता और जांच प्रक्रिया पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं कि आखिर एक जीवित व्यक्ति को बिना गहन परीक्षण के मुर्दाघर तक कैसे पहुंचा दिया गया। पीड़ित युवक ने आरोप लगाया है कि यदि उसे समय पर होश नहीं आता, तो शायद डॉक्टर उसका जीवित अवस्था में ही पोस्टमार्टम शुरू कर देते, जिससे उसकी जान जा सकती थी। वर्तमान में यह मामला पूरे जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है और लोग लापरवाह चिकित्सकों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। हालांकि इस पूरे घटनाक्रम पर अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है, लेकिन जॉन पारदी के इन आरोपों ने स्वास्थ्य विभाग की साख पर गहरा बट्टा लगा दिया है।