Edited By meena, Updated: 15 Oct, 2026 12:44 PM

हिन्दू संगठन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में पिछले 15 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहीं शिक्षिका लक्ष्मी प्रसना नवरात्र के अवसर पर लाल कपड़े और दीक्षा माला धारण कर बीते दिन विद्यालय पहुंची थीं...
सुकमा : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के कोंटा स्थित मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में नवरात्र के दौरान लाल वस्त्र और दीक्षा माला पहनकर पहुंची एक महिला शिक्षिका को विद्यालय में प्रवेश से रोके जाने का मामला सामने आया है। घटना से आहत शिक्षिका ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मामले की जानकारी मिलने के बाद हिंदू संगठनों ने विद्यालय परिसर पहुंचकर विरोध प्रदर्शन किया और स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कारर्वाई की मांग की।
हिन्दू संगठन से प्राप्त जानकारी के अनुसार, मदर टेरेसा ज्योति कॉन्वेंट स्कूल में पिछले 15 वर्षों से अध्यापन कार्य कर रहीं शिक्षिका लक्ष्मी प्रसना नवरात्र के अवसर पर लाल कपड़े और दीक्षा माला धारण कर बीते दिन विद्यालय पहुंची थीं। आरोप है कि धार्मिक वेशभूषा के कारण उन्हें विद्यालय में प्रवेश करने से रोक दिया गया। इस व्यवहार से आहत होकर उन्होंने नौकरी से इस्तीफा दे दिया।
घटना की जानकारी सामने आने के बाद विभिन्न हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता विद्यालय पहुंचे और प्रबंधन के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि विद्यालय में बड़ी संख्या में हिंदू समुदाय के विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। ऐसे में धार्मिक आस्था, पहचान और परंपराओं से जुड़े प्रतीकों पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं है। विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलने पर खंड शिक्षा अधिकारी एस. के. दीप और स्थानीय थाना प्रभारी शिवानंद तिवारी मौके पर पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर स्थिति को शांत कराया।
इस दौरान विद्यालय के प्राचार्य ने भी गलती स्वीकार करते हुए भविष्य में इस प्रकार की घटना की पुनरावृत्ति नहीं होने का आश्वासन दिया। हिंदू संगठनों ने विद्यालय प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा और मामले में आवश्यक कारर्वाई की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि विद्यालय में बसंत पंचमी के अवसर पर अवकाश रखा जाता है तथा उस दिन शैक्षणिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों का आयोजन नहीं किया जाता। संगठनों ने मांग की कि विद्यालय में शिक्षा विभाग के निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाए और किसी भी व्यक्ति के साथ जाति अथवा धार्मिक परंपराओं के आधार पर भेदभाव नहीं किया जाए। इस घटनाक्रम के बाद विद्यालय में धार्मिक स्वतंत्रता और संस्थागत नियमों को लेकर विवाद सामने आया है। हालांकि, शिक्षिका के इस्तीफे पर विद्यालय प्रबंधन के अंतिम निर्णय और शिक्षा विभाग की ओर से किसी औपचारिक कारर्वाई की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।