विश्व में एक मात्र मंदिर जहां उल्लू पर नहीं, हाथी पर विराजी है मां लक्ष्मी, दिवाली पर 5 दिन 24 घंटे होती है पूजा

Edited By meena, Updated: 22 Oct, 2022 03:24 PM

the only unique temple of maa lakshmi in ujjain

वैसे तो माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू है और मान्यता है कि मां लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर सबको आशीर्वाद देती हैं। लेकिन उज्जैन में विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मां लक्ष्मी हाथी पर सवार हैं। यह मंदिर उज्जैन के नई पेठ क्षेत्र में स्थित है...

उज्जैन(विशाल सिंह): वैसे तो माता लक्ष्मी का वाहन उल्लू है और मान्यता है कि मां लक्ष्मी उल्लू पर सवार होकर सबको आशीर्वाद देती हैं। लेकिन उज्जैन में विश्व का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां मां लक्ष्मी हाथी पर सवार हैं। यह मंदिर उज्जैन के नई पेठ क्षेत्र में स्थित है, जिसका कोई दूसरा रूप पूरे विश्व में कहीं नहीं है। खास बात यह कि इस बार दिवाली पर इस मंदिर में 5 हजार लीटर दूध से मां लक्ष्मी का अभिषेक किया जाएगा और व्यापारी यहां से बही खाते लिखने की शुरुआत करेंगे।

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दिवाली पर 5 दिन 24 घंटे खुलेंगे मंदिर के पट

मंदिर के पुजारी के मुताबिक दीपावली के पांचों दिन यह मंदिर चौबीस घंटे खुला रहेगा और दिन रात पूजा, अनुष्ठान जारी रहेगा। पुष्य नक्षत्र में धनतेरस पर सोने-चांदी के व्यापारी या जिनका कारोबार बहीखाते से जुड़ा हुआ है, वह मंदिर में मंत्र और यंत्र बनवाते हैं। मंत्र और यंत्र के माध्यम से व्यापारी मां लक्ष्मी ये यह प्रार्थना करते हैं कि खाता जल्दी पूरा हो आए और किसी तरह का कोई बकाया न रहे।

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दिवाली-धनतेरस पर बांटी जाती है बरकत

दिवाली- धनतेरस पर मंदिर में श्रद्धालुओं को माताजी की बरकत बांटी जाती है। सभी को पीले चावल, कोढिय़ां, एक सिक्का और हल्दी की गांठें आशीर्वाद स्वरूप प्रदान की जाती है। दिवाली पर सुबह 8 बजे से 12 बजे तक 5 हजार लीटर दूध से मां का अभिषेक किया जाएगा। शाम को 6 से रात 2 बजे तक महाभोग के दर्शन होते हैं। दिवाली के दिन हर साल मां का सोलह शृंगार किया जाता है। डा. महेश गुप्ता की ओर से सोलह शृंगार की रस्म अदा की जाती है। वहीं डॉ. अजय मिश्रा की ओर से भगवान विष्णु का शृंगार किया जाता है। श्रद्धालु भी अपनी ओर से मां गजलक्ष्मी को नैवेद्य अर्पित करते हैं।

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महाभारत कालीन कथा से जुड़ी है मंदिर की स्थापना

वहीं रोचक यह मान्यता भी पता चली है कि दीपावली पर इनकी विशेष पूजा होती है। जो महाभारत काल से चली आ रही है। महाभारत कालीन कथा के विषय में बताया कि जब जुएं में पांडव अपना सारा राजपाठ हार गए थे और जंगल-जंगल भटक रहे थे, तब हाथी अष्टमी पूजने के लिए माता कुंती परेशान हो रही थी। कौरव धन-संपदा और राजपाठ से संपन्न थे। उन्होंने मिट्टी का विशाल हाथी बनाकर सबसे कहा कि सब लोग इन्हीं की पूजा करेंगे। पांडवों ने मां कुंती को परेशान होते हुए देखा और इंद्र से प्रार्थना की। अर्जुन ने बाण द्वारा एक संदेश इंद्र को भेजा तो इंद्र ने ऐरावत हाथी को ही धरती पर उतार दिया। जिस पर स्वयं मां लक्ष्मी विराजमान थी। माता कुंती ने प्रसन्न होकर इनकी पूजा की। इधर, इंद्र ने नगर में भारी बारिश शुरू कर दी, जिससे कौरवों द्वारा बनाया गया मिट्टी का विशाल हाथी बारिश में गल गया। उनकी पूजा अधूरी रह गई। मान्यता है कि पांडवों को उनका खोया राज्य मां गजलक्ष्मी की कृपा से ही वापस मिला था।

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