अपनी ही सरकार के खिलाफ भाजपा नेता ने खोला मोर्चा, कहा- मैं सर्कस का शेर नहीं, मुझे जनता ने चुना है

Edited By meena, Updated: 13 Oct, 2026 05:22 PM

bjp leader amit saxena has opened a front against his own government

“मैं सर्कस का शेर नहीं हूं, मुझे जनता ने चुना है। मैं जनता की लड़ाई लड़ूंगा। अगर इसको लेकर मेरा निष्कासन भी होता है तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे अभी निकाल दो, लेकिन मैं हमेशा जनता के साथ खड़ा रहा हूं और आगे भी खड़ा रहूंगा।”

छिंदवाड़ा (साहुल सिंह) : किसानों की समस्याओं और जिले के जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर भाजपा नेता एवं जिला पंचायत उपाध्यक्ष अमित सक्सेना ने मंगलवार को छिंदवाड़ा के बस स्टैंड पर विशाल आमसभा कर अपनी राजनीतिक ताकत दिखाई। भाजपा जिला अध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस के बीच सक्सेना के तेवर आक्रामक नजर आए। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वे पार्टी की कार्रवाई से डरने वाले नहीं हैं और किसानों तथा जनता के मुद्दों पर अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। आमसभा के बाद वे कलेक्ट्रेट पहुंचे और राज्य शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर विभिन्न मांगों पर कार्रवाई की मांग की।

सभा को संबोधित करते हुए अमित सक्सेना ने कहा, “मैं सर्कस का शेर नहीं हूं, मुझे जनता ने चुना है। मैं जनता की लड़ाई लड़ूंगा। अगर इसको लेकर मेरा निष्कासन भी होता है तो मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता। मुझे अभी निकाल दो, लेकिन मैं हमेशा जनता के साथ खड़ा रहा हूं और आगे भी खड़ा रहूंगा।”

उनके इस बयान को भाजपा संगठन के साथ चल रहे विवाद के बीच उनके राजनीतिक रुख के स्पष्ट संकेत के रूप में देखा जा रहा है। सक्सेना ने किसानों के सवालों को प्राथमिकता देते हुए कहा कि जनप्रतिनिधि होने के नाते जनता की समस्याओं को उठाना उनकी जिम्मेदारी है।

सूखे, मुआवजे और पानी के मुद्दे पर सरकार को घेरा

अमित सक्सेना ने अपने ज्ञापन में छिंदवाड़ा जिले को सूखाग्रस्त घोषित करने की मांग प्रमुखता से उठाई। उनका कहना है कि किसानों की आर्थिक स्थिति और खेती से जुड़ी समस्याओं को देखते हुए शासन को राहत देने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए। उन्होंने चौसरा में प्रस्तावित न्यूक्लियर प्लांट का काम रोकने, किसानों को चार गुना मुआवजा देने और जिले के विभिन्न क्षेत्रों में कुएं तथा ट्यूबवेल खुदवाकर पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग भी रखी। इन मांगों के जरिए उन्होंने किसानों की समस्याओं, सिंचाई के संकट और जमीन के मुआवजे जैसे मुद्दों को एक साथ उठाया।

सक्सेना ने कहा कि किसानों के हितों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और शासन को उनकी समस्याओं का समाधान प्राथमिकता से करना चाहिए। आमसभा में उनके भाषण का केंद्र भी किसानों की समस्याएं और जनहित के मुद्दे रहे।

शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देकर उठाया सवाल

भाजपा जिला अध्यक्ष की ओर से जारी नोटिस पर अपनी बात रखते हुए सक्सेना ने कहा कि वे इसका जवाब 13 अक्टूबर के बाद देंगे। उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान का उदाहरण देते हुए सवाल किया कि जब शिवराज सिंह चौहान अपने क्षेत्र में प्रदर्शन कर सकते हैं, तो वे किसानों की मांगों को लेकर ज्ञापन क्यों नहीं दे सकते।

उनका यह बयान पार्टी के भीतर अनुशासन और जनहित के मुद्दों को लेकर उठे विवाद को और महत्वपूर्ण बनाता है। अब देखना होगा कि संगठन उनके जवाब पर क्या रुख अपनाता है और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होती है।

लोकसभा चुनाव के समय कांग्रेस छोड़ भाजपा में आए थे सक्सेना

अमित सक्सेना का राजनीतिक सफर भी मौजूदा घटनाक्रम के संदर्भ में चर्चा में है। लोकसभा चुनाव के दौरान वे कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हुए थे। अब भाजपा संगठन के साथ उनके मतभेद और किसानों के मुद्दों पर उनके आक्रामक रुख के बीच उनके कांग्रेस में वापस लौटने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं।

हालांकि, फिलहाल उनकी कांग्रेस में वापसी को लेकर कोई औपचारिक घोषणा सामने नहीं आई है। ऐसे में इसे अभी राजनीतिक अटकलों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। आने वाले दिनों में सक्सेना का रुख और दोनों दलों की प्रतिक्रिया इस चर्चा को नई दिशा दे सकती है।

22 हजार मतों से जीत ने बनाया था रिकॉर्ड

जिला पंचायत चुनाव में अमित सक्सेना ने करीब 22 हजार मतों के रिकॉर्ड अंतर से जीत हासिल की थी। उनकी इस जीत को क्षेत्र में उनके जनाधार और राजनीतिक प्रभाव के तौर पर देखा गया था। अब वही जनप्रतिनिधि भाजपा संगठन के नोटिस के बीच किसानों के मुद्दों पर खुलकर सामने आए हैं।

उनके समर्थकों के लिए यह संघर्ष जनहित के मुद्दों को लेकर उनकी प्रतिबद्धता का सवाल है, जबकि राजनीतिक स्तर पर यह घटनाक्रम भाजपा के भीतर असहज स्थिति पैदा कर सकता है। सक्सेना की आगे की रणनीति और पार्टी के साथ उनके संबंधों पर अब सबकी नजरें रहेंगी।

‘जनता के साथ खड़ा रहूंगा’

बस स्टैंड की आमसभा से लेकर कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपने तक सक्सेना ने यही संदेश देने की कोशिश की कि किसानों और जनता से जुड़े मुद्दों पर वे पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी में उनकी स्थिति चाहे जो हो, वे जनसमस्याओं को उठाते रहेंगे।

अब सवाल यह है कि क्या भाजपा संगठन उनके इस रुख को अनुशासनहीनता के तौर पर देखेगा या किसानों की मांगों को लेकर उनके पक्ष को सुनेगा। वहीं, कांग्रेस में संभावित वापसी की चर्चाओं के बीच अमित सक्सेना का अगला राजनीतिक कदम भी जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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