Edited By meena, Updated: 18 Mar, 2026 05:55 PM
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 मार्च, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन "जल गंगा संवर्धन अभियान" का शुभारंभ करेंगे। उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। इस दिन प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में...
भोपाल : मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 19 मार्च, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के दिन "जल गंगा संवर्धन अभियान" का शुभारंभ करेंगे। उज्जैन में राज्य स्तरीय कार्यक्रम होगा। इस दिन प्रदेश के सभी जिलों, नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों में भी जल स्रोतों या नदियों के समीप कार्यक्रम आयोजित कर अभियान की शुरुआत की जाएगी। मनरेगा आयुक्त अवि प्रसाद ने बताया कि लगभग साढ़े तीन माह तक चलने वाले इस प्रदेशव्यापी महाअभियान का समापन 30 जून को होगा। इसमें 18 विभाग शामिल होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ का नोडल विभाग होगा, जबकि नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग सह-नोडल विभाग रहेगा।
अभियान के संबंध में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग ने सभी जिलों के कलेक्टरों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। "जल गंगा संवर्धन अभियान" के अंतर्गत समाज की भागीदारी और विभिन्न सहभागी विभागों के माध्यम से नवीन जल संग्रहण संरचनाओं के निर्माण, भूजल संवर्धन, जल संग्रहण संरचनाओं की साफ-सफाई व मरम्मत / नवीनीकरण, जल संग्रहण संरचनाओं के अतिक्रमण हटाने, स्कूलों में पेयजल गुणवत्ता परीक्षण, आंगनबाड़ियों मेँ रूफ वॉटर हार्वेस्टिंग, औद्योगिक इकाईयों में रूफ वाटर हार्वेस्टिंग, जल स्त्रोतों में प्रदूषण के स्तर को कम करने, जल स्त्रोतों तथा जल वितरण प्रणालियों की साफ सफाई, राजस्व रिकार्ड में जल संग्रहण संरचनाओं व नहरों को अंकित करने और मानसून में किये जाने वाले पौधारोपण के लिए आवश्यक तैयारियों के कार्य किये जाएंगे।
हर जिले में प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में होगा क्रियान्वयन
जल गंगा संवर्धन अभियान का क्रियान्वयन संबंधित जिले के प्रभारी मंत्री के नेतृत्व में किया जाएगा। कलेक्टर अभियान के नोडल अधिकारी होंगे। उनकी अध्यक्षता में जिला जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्ययोजना तैयार कर मॉनिटरिंग करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जिला पंचायत-समन्वयक और सभी सहभागी विभागों के जिला स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। स्वयं सेवी संगठनों के प्रतिनिधियों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों, कृषि-अभियांत्रिकी शिक्षण व शोध संस्थानों के प्रतिनिधियों, जिले के प्रतिष्ठित संत व महात्माओं और जिले के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को इस समिति में आमंत्रित किया जा सकेगा। विकासखंड स्तर पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नोडल अधिकारी होंगे। उनके नेतृत्व में विकासखंड जल गंगा संवर्धन अभियान समिति कार्यों की निगरानी करेगी। इस समिति में मुख्य कार्यपालन अधिकारी, जनपद पंचायत-समन्वयक और सहभागी विभागों के विकासखण्ड स्तरीय अधिकारी सदस्य होंगे। जल संरक्षण व संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले 4–5 सरपंच तथा विकासखण्ड के प्रतिष्ठित व्यक्ति इस समिति में आमंत्रित किए जा सकेंगे।
ये विभाग अभियान में होंगे शामिल
जल गंगा संवर्धन अभियान में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, नगरीय प्रशासन एवं आवास विभाग, वन विभाग, जल संसाधन विभाग, नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग, उद्यानिकी विभाग, किसान कल्याण तथा कृषि विकास विभाग, औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विभाग, पर्यावरण विभाग, महिला एवं बाल विकास विभाग, स्कूल शिक्षा विभाग, उच्च शिक्षा विभाग, राजस्व विभाग, संस्कृति विभाग, जन अभियान परिषद, जनसंपर्क विभाग शामिल हैं।
विभागवार होने वाले प्रमुख कार्य
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग
इस विभाग द्वारा वर्ष 2025 में जल गंगा संवर्धन अभियान में मनरेगा अंतर्गत प्रारंभ किए गए 86,360 खेत तालाब, 553 अमृत सरोवर, 1.5 लाख डगवेल रिचार्ज में से प्रचलित कार्यों को पूरा कराया जाएगा। इसके अलावा प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 2.0 के अंतर्गत जल संरक्षण और संवर्धन के 2200 कार्यों का क्रियान्वयन किया जाएगा। मनरेगा अंतर्गत प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना–वॉटरशेड विकास 1.0 की परियोजनाओं में निर्मित किए गए चेक डेम तथा स्टापडेम की मरम्मत व नवीनीकरण का कार्य किया जाएगा। इसके लिए 10 हजार का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। मां नर्मदा परिक्रमा पथ, गंगोत्री हरित परियोजना और एक बगिया मां के नाम परियोजना के अंतर्गत विगत वर्ष किए गए पौधरोपण के गैप फिलिंग के लिए आवश्यक तैयारी की जाएगी। पूर्व निर्मित जल संग्रहण संरचनाओं जैसे तालाब, चेकडेम और स्टॉपडेम से जनसहयोग से गाद निकालने का कार्य किया जाएगा। निकाली गई मिट्टी/गाद स्थानीय किसानों को उपयोग के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही बेतवा, क्षिप्रा एवं गंभीर नदियों के पुनर्जीवन की कार्य योजना तैयार की जाएगी।
24 हजार 662 आंगनबाड़ियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं और पोषण वाटिकाओं को किया जाएगा विकसित
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आंगनबाड़ियों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग संरचनाएं और पोषण वाटिकाओं को विकसित करने का कार्य किया जाएगा। इसके लिए 24 हजार 662 का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नगरीय विकास विभाग द्वारा निकायों में अमृत 2.0 अंतर्गत जल संग्रहण संरचनाओं का जीर्णोद्धार, एसबीएम 2.0 अंतर्गत नालों (नदियों में मिलने वाले) के शोधन की कार्ययोजना, जल ग्रहण संरचनाओं (तालाब/नदी/बावड़ी) का संवर्धन एवं अतिक्रमण मुक्त करना, नाले - नालियों की साफ-सफाई एवं सौन्दर्यीकरण, रेन वॉटर हार्वेस्टिंग प्रणाली स्थापित कराना, हरित क्षेत्र विकसित करना, मानसून में किए जाने वाले पौधरोपण के लिए आवश्यक तैयारी, जल संरक्षण में युवाओं की भागीदारी के लिए अमृतमित्र बनाकर माय भारत पोर्टल पर पंजीकरण करना, नगरीय निकायों के प्रमुख स्थलों पर गर्मियों में पेय जल सुविधा के लिए जन सहयोग से सार्वजनिक प्याऊ की व्यवस्था करना जैसे कार्य किए जाएंगे।

पौधरोपण सहित कई काम करेंगे अलग-अलग विभाग
वन विभाग द्वारा जल ग्रहण क्षेत्र उपचार योजना अंतर्गत 1.30 लाख हेक्टेयर में भूजल संवर्धन के कार्य बोल्डर चेकडेम, परकोलेशन टैंक, कंटूर ट्रेंच, तालाबों, सांसर, स्टापडेम, झिरिया, वन क्षेत्रों में पूर्व निर्मित तालाबों का गहरीकरण, "अविरल निर्मल नर्मदा" योजना के तहत 5650 हेक्टेयर में और अन्य योजनाओं के अंतर्गत 1.16 लाख हेक्टेयर में पौधों के रोपण की तैयारी सहित अन्य कार्य किए जाएंगे। इसी तरह जल संसाधन विभाग एवं नर्मदा घाटी विकास द्वारा लघु सिंचाई योजनाओं के तालाबों की मरम्मत, नहरों की सफाई, स्टॉपडेम और बैराज की मरम्मत तथा नहर प्रणालियों के सुदृढ़ीकरण का कार्य किया जाएगा। लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग नल जल योजनाओं के पंप ऑपरेटरों को प्रशिक्षित करेगा, स्कूलों और आंगनबाड़ियों के जल स्रोतों की गुणवत्ता का परीक्षण करेगा और पाइपलाइन लीकेज की मरम्मत करेगा। उद्यानिकी विभाग सूक्ष्म सिंचाई क्षेत्र का विस्तार कार्य, विकासखंडों में पानी चौपाल का आयोजन एवं 55 हजार हेक्टेयर में पौधरोपण करेगा।
किसान कल्याण एंव कृषि विकास विभाग द्वारा सपरी सॉफ्टवेयर का उपयोग कर बलराम तालाब, लाइन फार्म पांड का निर्माण किया जाएगा। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग द्वारा पौधरोपण, औद्योगिक इकाइयों में रूफ टॉप रेन वॉटर हार्वेस्टिंग और अपशिष्ट जल के पुन: उपयोग को बढ़ावा देने के कार्य किए जांएगे। सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विभाग द्वारा औद्योगिक क्षेत्रों-कलस्टर्स में पौधरोपण की तैयारी औद्योगिक इकाईयों में रेन वॉटर हार्वेस्टिंग, विकासाधीन औद्योगिक क्षेत्रों-कलस्टर्स में जल निकासी एवं ईटीपी-एसटीपी कार्य की स्वीकृति देने का कार्य किया जाएगा।
पर्यावरण विभाग द्वारा बेतवा, क्षिप्रा, कान्ह और गंभीर नदियों के उद्गम से प्रदेश की सीमा तक सर्वेक्षण कर दूषित जल मिलने के स्थानों का चिन्हांकन और जल गुणवत्ता का मापन किया जाएगा। साथ ही अन्य नदियों में मिलने वाले नालों का चिन्हांकन और जल गुणवत्ता का मापन और जन जागरूकता के लिए कार्यक्रमों का आयोजन का आयोजन किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग उठाएगा ये जिम्मेदारी
स्कूल शिक्षा विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के सहयोग से सभी स्कूलों के पेय जल स्त्रोतों के जल की गुणवत्ता का परीक्षण कराना, स्कूलों के पेय जल स्त्रोत हेंडपम्पों के आसपास साफ सफाई तथा गंदे पानी के निस्तरण के लिए सोख्ता पिट का निर्माण कराना, डब्ल्यूओडब्ल्यू एप्लीकेशन का उपयोग कर सभी स्कूलों में जल भंडारण टंकियों की साफ सफाई, ग्रीष्मकाल में विद्यालयों में वाटरकूलर-मटकों से शीतल एवं शुद्ध पेय जल की व्यवस्था, स्कूलों में जल संरक्षण के संबंध में जागरूकता के लिए विभिन्न गतिविधियों जैसे–निबंध लेखन प्रतियोगिता (जल संरक्षण के क्षेत्र में कार्य करने वाले महत्वपूर्ण व्यक्ति, विश्व जल दिवस, जल संरक्षण के उपाय, जल संवर्धन का महत्व, नदी को जानों इत्यादि विषयों पर) का आयोजन, पोस्टर व रंगोली प्रतियोगिता, परिचर्चा व संवाद तथा जल संरक्षण के लिए शपथ और प्रार्थना सभा में विद्यार्थियों को जल संवर्धन के लिए जागरूक करना, जैसे काम करेगा।
उच्च शिक्षा विभाग करेगा जल आधारित गतिविधियां
उच्च शिक्षा विभाग रूफ वॉटर हार्वेंस्टिंग का कार्य, प्रदेश के विश्वविद्यालयों तथा महाविद्यालयों में जागरूकता के लिए जल आधारित गतिविधियों जैसे निबंध प्रतियोगिता, पोस्टर प्रतियोगिता, स्लोगन प्रतियोगिता, रैली, वाद विवाद प्रतियोगिता, भाषण प्रतियोगिता का आयोजन करेगा। दूसरी ओर, राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा पूर्व में निर्मित किए गए 5550 अमृत सरोवरों में से राजस्व अभिलेखों में दर्ज होने से शेष 1332 अमृत सरोवरों और द्वितीय चरण के 553 अमृत सरोवरों को भी राजस्व अभिलख में दर्ज करना, समस्त विभागों द्वारा पूर्व में निर्मित किए गए तालाबों, चेकडेम तथा स्टाप डेम को राजस्व अभिलेखों में दर्ज कराना, राजस्व अभिलेख में अन्य जल संरचनाओं तथा जल संसाधन विभाग की नहरों को दर्ज करना, जल संरचनाओं के अतिक्रमण को चिन्हित करने एवं अतिक्रमण हटाने के लिए संबंधित विभाग का सहयोग करेगा।
अभियान से समाज का जुड़ाव और जन भागीदारी
“जल गंगा संवर्धन अभियान” को जन आंदोलन का स्वरूप देने के लिए सरकार और समाज के बीच सतत संवाद स्थापित किया जाएगा। ताकि, जनता को जल संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके। इसके साथ ही युवाओं को अभियान से जोड़ा जाएगा। हर गांव से युवाओं को स्वयंसेवक के रूप में प्रेरित किया जाएगा। इन युवाओं को भारत सरकार के माय भारत पोर्टल पर जल दूत के रूप में पंजीकृत किया गया है। इन सभी जल दूतों को अभियान में उनकी भूमिका और दायित्वों के संबंध में प्रशिक्षण दिया जाएगा।
अभियान की सतत की जाएगी मॉनिटरिंग
अभियान की मॉनिटरिंग के लिए एमपीएसईडीसी के सहयोग से एक डिजिटल डैशबोर्ड और आईटी पोर्टल तैयार किया जाएगा। इसमें सभी विभागों की गतिविधियों का डेटा दर्ज होगा।