Fact check: प्लास्टिक नहीं GFRP के सरिए से बन रहा उज्जैन-इंदौर हाईवे! स्टील के सरियों के मुक़ाबले कई गुना बेहतर और जंगरोधी

Edited By meena, Updated: 17 Mar, 2026 05:58 PM

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इंदौर–उज्जैन सिक्सलेन सड़क परियोजना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि आरसीसी ड्रेनेज निर्माण में “प्लास्टिक के सरिये” का इस्तेमाल किया जा रहा है...

भोपाल: इंदौर–उज्जैन सिक्सलेन सड़क परियोजना को लेकर सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में दावा किया जा रहा है कि आरसीसी ड्रेनेज निर्माण में “प्लास्टिक के सरिये” का इस्तेमाल किया जा रहा है। जांच में यह दावा भ्रामक पाया गया है।

क्या है वायरल दावा

वायरल वीडियो में कहा गया कि निर्माण कार्य में लोहे की जगह प्लास्टिक के सरिये लगाए जा रहे हैं, जिससे सड़क की गुणवत्ता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

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क्या है सच्चाई

विभागीय अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा मौके का निरीक्षण करने पर स्पष्ट हुआ कि निर्माण में प्लास्टिक नहीं, बल्कि जीएफआरपी (GFRP) बार्स का उपयोग किया जा रहा है। जीएफआरपी का पूरा नाम ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर है, जो आधुनिक निर्माण तकनीक में इस्तेमाल होने वाली उन्नत सामग्री है।

विशेषज्ञों के मुताबिक यह सामग्री जंगरोधी होती है और मजबूती व टिकाऊपन के मामले में पारंपरिक स्टील सरियों से बेहतर मानी जाती है। इसके साथ ही इसका वजन हल्का होने से निर्माण कार्य में इसका उपयोग आसान होता है।

मानकों के अनुसार है तकनीक

सड़क निर्माण से जुड़े मानकों के अनुसार इंडियन रोड्स कांग्रेस के आईआरसी कोड 137: 2022 में सड़क परियोजनाओं में जीएफआरपी सरियों के उपयोग को प्रमाणित और सुरक्षित माना गया है। इसलिए इस तकनीक का उपयोग पूरी तरह मानकों के अनुरूप है।

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क्या होता है GFRP

जीएफआरपी यानी ग्लास फाइबर रीइनफोर्स्ड पॉलिमर एक आधुनिक निर्माण सामग्री है, जिसे कांच के फाइबर और पॉलिमर रेजिन से तैयार किया जाता है। इसे फाइबर सरिया भी कहा जाता है। यह बिजली और मैग्नेटिक फील्ड को कंडक्ट नहीं करता और जंग से भी प्रभावित नहीं होता। इसका उपयोग पुल-फ्लाईओवर, समुद्री या नमक वाले इलाकों, पानी की टंकियों, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट और सड़क व मेट्रो परियोजनाओं में किया जाता है।

कुल मिलाकर कहा जा सकता है कि इंदौर-उज्जैन सिक्सलेन निर्माण में “प्लास्टिक के सरिये” इस्तेमाल होने का दावा गलत और भ्रामक है। असल में परियोजना में मानकों के अनुरूप आधुनिक GFRP तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।

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