Edited By meena, Updated: 30 Oct, 2026 02:43 PM

छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला कलेक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रूम में निजी व्यक्तियों के माध्यम से शासकीय दस्तावेजों से संबंधित कार्य कराए जाने और कथित आर्थिक अनियमितताओं...
दुर्ग : छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिला कलेक्ट्रेट स्थित रिकॉर्ड रूम में निजी व्यक्तियों के माध्यम से शासकीय दस्तावेजों से संबंधित कार्य कराए जाने और कथित आर्थिक अनियमितताओं का मामला सामने आया है। कलेक्टर अभिजीत सिंह के औचक निरीक्षण के बाद प्राथमिक जांच में शिकायतों की पुष्टि होने पर चार महिला कर्मचारियों और एक भृत्य के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश जारी किए गए हैं।
जिला प्रशासन से शुक्रवार को प्राप्त जानकारी के अनुसार, कलेक्ट्रेट के रिकॉर्ड रूम में पदस्थ कर्मचारियों द्वारा बाहरी व्यक्तियों की सहायता से सरकारी अभिलेखों से संबंधित कार्य कराए जाने की शिकायतें लंबे समय से मिल रही थीं। आरोप है कि निजी व्यक्ति रिकॉर्ड शाखा में बैठकर सरकारी दस्तावेजों की पड़ताल करने के साथ ही आवेदकों के लिए अभिलेख तैयार करने और उपलब्ध कराने का काम कर रहे थे। इसके बदले आर्थिक लाभ लिए जाने की भी शिकायतें सामने आई थीं।
मामले का खुलासा उस समय हुआ, जब एक महिला अधिवक्ता ने कलेक्टर अभिजीत सिंह से मुलाकात कर रिकॉर्ड शाखा में संचालित गतिविधियों की शिकायत की। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कलेक्टर स्वयं महिला अधिवक्ता के साथ रिकॉर्ड रूम पहुंचे और वहां की कार्यप्रणाली का औचक निरीक्षण किया। कलेक्टर सिंह ने बताया कि रिकॉर्ड रूम में महिलाकर्मी सुवर्षा राव, पुष्पा वर्मा, भानूमति मरकाम और उषा यादव पदस्थ थीं। इनके अतिरिक्त प्यून बलदाऊ यादव की भी रिकॉर्ड रूम में ड्यूटी थी।
अधिवक्ताओं की ओर से इन कर्मचारियों के विरुद्ध आर्थिक अनियमितताओं की शिकायत भी की गई थी। शिकायतकर्ताओं का आरोप था कि बाहरी व्यक्तियों के माध्यम से काम कराने वाले आवेदकों के अभिलेख अपेक्षाकृत जल्दी उपलब्ध कराए जा रहे थे, जबकि सामान्य नागरिकों को अनावश्यक रूप से कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे थे। विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले लोगों को अपने रिकॉर्ड प्राप्त करने के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा था। कलेक्टर के निर्देश पर मामले की प्राथमिक जांच कराई गई, जिसमें संबंधित कर्मचारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोप सही पाए गए। इसके आधार पर सभी पांच कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू करने के आदेश दिए गए हैं। प्रशासनिक कारर्वाई के तहत तीन महिला कर्मचारियों और प्यून बलदाऊ यादव को रिकॉर्ड शाखा से हटाकर अन्य शाखाओं में पदस्थ कर दिया गया है।
वहीं, जांच के दायरे में शामिल एक महिला कर्मचारी दो दिन पहले ही सेवानिवृत्त हो चुकी है। विभागीय जांच लंबित होने के कारण उनके सेवानिवृत्ति संबंधी कुछ भुगतानों को रोक दिया गया है। जानकारी के मुताबिक, सेवानिवृत्त कर्मचारी को फिलहाल केवल सामान्य भविष्य निधि (जीपीएफ) और बीमा की राशि का भुगतान किया गया है। अन्य देयकों का भुगतान जांच में निर्दोष पाए जाने के बाद किए जाने की बात कही गई है।
डिप्टी कलेक्टर खेमलाल वर्मा ने बताया कि सभी संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है। कर्मचारियों को अपने बचाव में गवाह प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जांच प्रक्रिया पूरी होने और निष्कर्ष सामने आने के बाद नियमानुसार आगे की कारर्वाई की जाएगी। फिलहाल प्रशासन की कारर्वाई के बाद कलेक्ट्रेट की रिकॉर्ड शाखा में सरकारी अभिलेखों के रखरखाव, उनकी उपलब्धता और बाहरी व्यक्तियों की भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं। विभागीय जांच में संबंधित कर्मचारियों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी और कथित आर्थिक अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।