Edited By Desh Raj, Updated: 21 May, 2026 03:21 PM

जो कभी मध्यप्रदेश के गृहमंत्री थे, मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था और न्याय जिनके हाथ में था, वही गृहमंत्री हिम्मत कोठारी पुलिस से इंसाफ के लिए जमीन पर बैठकर इंसाफ मांग रहे हैं लेकिन उनको पुलिस से मदद नहीं मिल रही।
रतलाम (समीर खान): जो कभी मध्यप्रदेश के गृहमंत्री थे, मध्यप्रदेश में कानून व्यवस्था और न्याय जिनके हाथ में था, वही गृहमंत्री हिम्मत कोठारी पुलिस से इंसाफ के लिए जमीन पर बैठकर इंसाफ मांग रहे हैं लेकिन उनको पुलिस से मदद नहीं मिल रही।
एसपी ऑफिस में उस समय हडकंप मच गया जब पूर्व गृहमंत्री हिम्मत कोठारी एसपी के चेंबर के बाहर धरने पर बैठ गए। मीसाबंदी वृद्ध के खाली प्लॉट पर अवैध कब्जे की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने से कोठारी नाराज हो गए और कार्रवाई की मांग को लेकर एसपी के चेंबर के बाहर ही ज़मीन पर बैठ गए।
दरअसल हिम्मत कोठारी उनके बचपन के मित्र और मीसाबंदी बसंत पुरोहित के दीनदयाल नगर थाना क्षेत्र स्थित एक प्लाट पर कब्जे के मामले में लगातार शिकायत और थाने के चक्कर काटने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से नाराज हुए। उनका कहना है फरियादी सारे दस्तावेज पेश कर चुका है और सामने वाले पक्ष के पास कोई भी दस्तावेज उपलब्ध नहीं है।
ये आम आदमी की लड़ाई, कोई राजनीतिक लड़ाई नहीं- हिम्मत कोठारी
हिम्मत कोठारी न्याय नहीं मिलने से इतने आहत है कि कह रहे है कि अभी मैं पार्टी का बंदा हू, पार्टी से अनुमति लेनी होगी, लेकिन न्याय नहीं मिला तो भी वो लड़ाई लड़ेंगे चाहे इसके लिए उनको पार्टी छोड़नी पड़े। कोठारी ने कहा न तो जनप्रतिनिधि सुनने वाले हैं और न हीं उनकी पार्टी के नेता सुन रहे हैं। एक आम आदमी को गुंडे और बदमाश दबा रहे, इससे दर्दनाक स्थिति नहीं हो सकती है। वहीं मामले को लेकर पहले भी पूर्व गृहमंत्री कोठारी एसपी अमित कुमार से मिले थे। उन्होंने कहा कि टीआई एसपी के निर्देशों का पालन नहीं कर रहा है।
हमारी पार्टी के नेता भी गूंगे और बहरे हो गए हैं-कोठारी
मीडिया से चर्चा करते हुए पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी ने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति का मामला नहीं है ,यदि आम जनता के साथ ऐसा होता रहा तो अराजकता आ जाएगी। हिम्मत कोठारी यहां तक कह गए कि अगर कार्रवाई नहीं होती है तो पार्टी से अनुमति लेकरआमरण अनशन पर बैठ जाएंगे। पार्टी अनुमति नहीं देगी तो पार्टी छोड़कर लड़ाई तो लड़नी पड़ेगी। कोठारी ने कहा कि हमारी भी पार्टी के नेता गूंगे और बहरे हो गए हैं, न सुनते हैं न देखते हैं।