Edited By meena, Updated: 27 Mar, 2026 06:23 PM

हाईकोर्ट के जज पर दबाव बनाने के आरोपों को लेकर भाजपा विधायक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। गुरुवार को हाईकोर्ट से उन्हें तगड़ा झटका लगा है। इस मामले में दायर याचिका...
भोपाल: हाईकोर्ट के जज पर दबाव बनाने के आरोपों को लेकर भाजपा विधायक की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही। गुरुवार को हाईकोर्ट से उन्हें तगड़ा झटका लगा है। इस मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाठक की ओर से रखी गई प्रारंभिक आपत्ति पर सख्त टिप्पणी कर कहा, आपके क्लाइंट के कृत्य को हाईकोर्ट के जज ने स्वयं उजागर किया है। मामले में मध्य प्रदेश कांग्रेस का बड़ा बयान सामने आया है।
मध्य प्रदेश कांग्रेस ने सोशल मीडिया पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कोर्ट में हुई सुनवाई को विश्वास जताया है। उन्होंने एक्स पर पोस्ट शेयर करते हुए लिखा- सत्ता के संरक्षण में मध्य प्रदेश के खनिज से अपनी और कुबेर कोठी भरते विधायक संजय पाठक पर अब न्यायालय का शिकंजा कस रहा है! अवैध खनन के आरोपी विधायक के काले कारनामे अब न्यायालय में उजागर है! सत्ता का संरक्षण अब काम नहीं आएगा और न्यायालय से हर सच सामने आएगा।
भाजपा विधायक संजय पाठक पर जबलपुर के सिहोरा तहसील में 443 करोड़ रुपए के कथित अवैध खनन मामले की सुनवाई कर रहे हाईकोर्ट के जज को धमकाने और दवाब बनाने के आरोप लगे थे। मामले में गुरुवार को हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा - आपके पक्षकार के कृत्य को हाईकोर्ट के जज ने स्वयं उजागर किया है।
मामले में याचिकाकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित की ओर से कोर्ट में पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद कुमार श्रीवास्तव ने जानकारी दी कि संजय पाठक की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अनिल खरे ने हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कुछ न्याय दृष्टांतों का हवाला देते हुए दलील दी कि यह याचिका मेंटेनेबल (चलायमान) नहीं है। इस पर कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मेंटेनेबिलिटी के मुद्दे पर आगे सुनवाई की जाएगी। कोर्ट ने अगली सुनवाई 2 अप्रेल रखी है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाठक की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता को अगली तारीख पर एमिकस क्यूरी (न्यायमित्र) के रूप में उपस्थित होने की सलाह भी दी।
क्या है पूरा मामला?
भाजपा विधायक पर आरोप है कि उन्होंने अवैध उत्खनन से जुड़े मामले में हाईकोर्ट के जज से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा ने लिखित आदेश में उल्लेख किया था कि पाठक ने एक विशेष मामले पर चर्चा के लिए उनसे कई बार फोन पर संपर्क करने की कोशिश की। बाद उन्होंने स्वयं को मामले की सुनवाई से अलग कर लिया था। इस मामले में अब Madhya Pradesh High Court में याचिका दायर की गई है, जिसमें कार्रवाई की मांग की गई है।