Edited By meena, Updated: 27 Mar, 2026 08:26 PM

मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में शिवपुरी के प्राथमिक शिक्षक साकेत कुमार पुरोहित को बड़ी राहत दी है...
भोपाल: मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने एक अहम फैसले में शिवपुरी के प्राथमिक शिक्षक साकेत कुमार पुरोहित को बड़ी राहत दी है। शिक्षक को सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री की मिमिक्री वाला वीडियो पोस्ट करने के कारण निलंबित कर दिया गया था, लेकिन अदालत ने इस निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। शिक्षक के खिलाफ भाजपा विधायक ने शिकायत की थी जिसके आधार पर अधिकारियों ने कार्रवाई की थी।
कोर्ट ने स्पष्ट रूप से कहा कि केवल निलंबन का अधिकार होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसका उपयोग विवेकपूर्ण तरीके से और ठोस आधार पर किया जाना चाहिए। यह टिप्पणी प्रशासनिक निर्णयों की जवाबदेही को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
क्या है पूरा मामला
यह मामला शिवपुरी जिले के शिक्षक साकेत कुमार पुरोहित से जुड़ा है, जिन्हें 13 मार्च 2026 को फेसबुक पर एक वीडियो पोस्ट करने के बाद निलंबित किया गया था। वीडियो में उन्होंने रसोई गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमतों पर टिप्पणी करते हुए नरेंद्र मोदी की मिमिक्री की थी। इस वीडियो के सामने आने के बाद पिचौर से भाजपा विधायक प्रीतम लोधी ने शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर शिक्षा विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए शिक्षक को निलंबित कर दिया और बीईओ कार्यालय बदरवास से अटैच कर दिया।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं
याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट में कहा गया कि वीडियो में कोई भी आपत्तिजनक सामग्री नहीं थी। साथ ही यह भी तर्क दिया गया कि बिना किसी स्वतंत्र जांच के जल्दबाजी में कार्रवाई की गई, जो न्यायसंगत नहीं है। वहीं, शासन की ओर से यह दलील दी गई कि निलंबन कोई सजा नहीं होता, बल्कि यह एक अंतरिम प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करना होता है।
अदालत की अहम टिप्पणी
न्यायमूर्ति आशीष श्रोती की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि निलंबन जैसे अधिकारों का इस्तेमाल सोच-समझकर किया जाना चाहिए। केवल अधिकार होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसके पीछे उचित कारण और प्रक्रिया भी होनी चाहिए। अदालत ने यह भी कहा कि शिकायत मिलते ही तुरंत की गई कार्रवाई से अधिकारियों की स्वतंत्र सोच पर सवाल उठते हैं। साथ ही 2005 के शासन निर्देशों का पालन न होना भी सामने आया। अधिकारियों ने दवाब में कार्रवाई की है।
नए सिरे से निर्णय के निर्देश
अंततः मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश को प्रथम दृष्टया त्रुटिपूर्ण मानते हुए उस पर रोक लगा दी। कोर्ट ने मामले को संबंधित अधिकारी के पास वापस भेजते हुए निर्देश दिया कि सभी तथ्यों, नियमों और प्रक्रियाओं को ध्यान में रखते हुए नए सिरे से निर्णय लिया जाए।