विष्णु सागर के तट पर विराजमान हैं मारकंडेश्वर महादेव, भक्त की रक्षा के लिए काल को बांधा दिया था जंजीरों से

Edited By meena, Updated: 12 Jul, 2023 05:07 PM

markandeshwar mahadev is sitting on the banks of vishnusagar

धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो द्वादश ज्योतिलिंर्गों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर का मंदिर है...

उज्जैन(विशाल सिंह): धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो द्वादश ज्योतिलिंर्गों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर का मंदिर है, जिनके बारे में मान्यता है कि वे अकाल मृत्यु के भय को समाप्त कर देते हैं, जिसके लिए प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आते हैं लेकिन इस धार्मिक नगरी मे भगवान शिव का एक ऐसा चमत्कारी मंदिर भी है। जहां पर भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने काल को जंजीरों से बांध दिया। भगवान शिव के इसी चमत्कार के कारण वर्षभर जन्मदिन और विवाह वर्षगांठ पर श्रद्धालुजन मंदिर में विशेष पूजा अर्चना कर आयु और आरोग्यता की कामना करते हैं।

PunjabKesari

विष्णुसागर के तट पर विराजमान हैं मारकंडेश्वर महादेव, भक्त की रक्षा के लिए यमराज को जंजीरों से बांध दिया था

मंदिर के पुजारी ने बताया कि मार्कण्डेश्वर ऋषि ने यहां काल को परास्त कर मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी और चिरंजीवी हुए थे। मान्यता है भक्तों की रक्षा के लिए महाकाल काल को देख रहे हैं। मार्कण्डेश्वर महादेव की पूजा अर्चना करने से भक्तों को आयु आरोग्य की प्राप्ति होती है। विष्णुसागर के तट पर विराजमान हैं। मारकंडेश्वर महादेव, भक्त की रक्षा के लिए यमराज को जंजीरों से बांध दिया था। धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो द्वादश ज्योतिलिंर्गों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर का मंदिर है।

PunjabKesari

धार्मिक नगरी उज्जैन में वैसे तो द्वादश ज्योतिलिंर्गों में से एक विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर का मंदिर है, जिनके बारे में मान्यता है कि वे अकाल मृत्यु के भय को समाप्त कर देते हैं, जिसके लिए प्रतिदिन लाखों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन आते हैं लेकिन इस धार्मिक नगरी मे भगवान शिव का एक ऐसा चमत्कारी मंदिर भी है। जहां पर भक्त की रक्षा करने के लिए भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने यमराज को जंजीरों से बांध दिया। भगवान शिव के इसी चमत्कार के कारण वर्षभर जन्मदिन और विवाह वर्षगांठ पर श्रद्धालुजन मंदिर में विशेष पूजा अर्चना कर आयु और आरोग्यता की कामना करते हैं।

PunjabKesari

यहां ऋषि मार्कण्डेय ने मृत्यु पर की थी विजय प्राप्त

विष्णुसागर के तट पर चोरियासी महादेव मे 36 वां स्थान रखने वाले भगवान श्री मार्कण्डेश्वर महादेव का 5000 वर्षों पुराना मंदिर है। जो कि सम्राट विक्रमादित्य के शासनकाल का माना जाता है। मंदिर के पुजारी पं. दीप मेहता ने बताया कि यह वही मंदिर है जहां ऋषि मार्कण्डेय ने काल को परास्त कर मृत्यु पर विजय प्राप्त की थी और वे यही पर चिरंजीवी हुए थे. पं. दीप मेहता ने बताया कि पद्म पुराण में इस बात का उल्लेख है कि ऋषि मृकंड मुनी ने भगवान ब्रह्मा की तपस्या कर पुत्र प्राप्ति का आशीर्वाद प्राप्त किया था, लेकिन उनके पुत्र ऋषि मार्कण्डेय की आयु अल्प थी जिसके कारण ऋषि मृकंड पुत्र ऋषि मार्कण्डेय की अल्प आयु को लेकर चिंतित रहने लगे।

PunjabKesari

महादेव ने यमराज को मंदिर में जंजीरों से बांध दिया था

यमराज द्वारा मार्कण्डेय के प्राण लेने के लिए फेंके गए पाश के कारण भगवान शिव प्रकट हुए और उन्होंने यमराज को मंदिर में जंजीरों से बांध दिया था। साथ ही ऋषि मार्कण्डेय को वरदान दिया था कि अब आपकी आयु 12 कल्प की रहेगी। आशीर्वाद के बाद ऋषि मार्कण्डेय अष्ट चिरंजीवी हो गए। पुजारी पं. दीप मेहता ने बताया कि वैसे तो वर्ष भर ही मंदिर में अनेक आयोजन होते हैं, लेकिन श्रावण मास में मार्कण्डेश्वर महादेव मंदिर के पट रात 3:00 बजे से ही खुल जाते हैं।

रात्रि को भगवान का विशेष पूजन अर्चन कपूर आरती के बाद भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन किया जाता है। मंगला आरती के बाद भक्त दिन भर भगवान का अभिषेक पूजन करते हैं। इस पूजन अर्चन के बाद शाम 4 बजे से पुन: भगवान का पंचामृत अभिषेक पूजन, श्रृंगार व सांध्य आरती का क्रम अनवरत जारी रहता है।

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!