Edited By Himansh sharma, Updated: 12 Oct, 2026 06:13 PM

मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सरकार के स्तर तक पहुंच गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश के सीहोर जिले के कोसमी गांव में आदिवासी परिवारों के मकान तोड़े जाने का मामला अब सरकार के स्तर तक पहुंच गया है। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के विरोध और धरने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को पूरे घटनाक्रम की जांच करने के लिए कहा है। इस फैसले के बाद प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर जवाबदेही तय होने की उम्मीद बढ़ गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि शिवराज सिंह चौहान वरिष्ठ नेता हैं और उन्होंने जो विषय उठाया है, उसकी गंभीरता से जांच कराई जाएगी। सीएम ने स्पष्ट किया कि मुख्य सचिव को इस संबंध में आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। अब जांच के दौरान यह स्पष्ट हो सकेगा कि कोसमी गांव में किन परिस्थितियों में मकानों को तोड़ने की कार्रवाई की गई और इसमें निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
पीड़ित परिवारों से मिलने पहुंचे शिवराज, कार्रवाई पर जताई नाराजगी
यह पूरा मामला सीहोर जिले की बुधनी विधानसभा के कोसमी गांव का है। यहां वन विभाग और प्रशासन की कार्रवाई के दौरान आदिवासी परिवारों के घरों को तोड़े जाने की शिकायत सामने आई थी। रविवार को केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान गांव पहुंचे और प्रभावित परिवारों से मुलाकात कर उनकी परेशानियां सुनीं।
ग्रामीणों की स्थिति देखने के बाद शिवराज सिंह चौहान ने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि गरीब परिवारों के आशियाने उजड़ने के साथ उनकी फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। इसके अलावा पानी की जरूरत पूरी करने के लिए इस्तेमाल होने वाले कुएं को मिट्टी से भर दिए जाने का मामला भी सामने आया। इन परिस्थितियों को लेकर उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी जाहिर की।
मुख्य सचिव और भाजपा प्रदेशाध्यक्ष से की बात
मौके पर वरिष्ठ प्रशासनिक और वन विभाग के अधिकारियों की अनुपस्थिति पर भी शिवराज सिंह चौहान ने आपत्ति जताई। उन्होंने घटनास्थल से ही मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल को फोन कर पूरे मामले की जानकारी दी और अपनी चिंता व्यक्त की। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल से भी बातचीत कर प्रभावित परिवारों की स्थिति से अवगत कराया।
शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि जिन परिवारों के मकान तोड़े गए हैं, उन्हें बेसहारा नहीं छोड़ा जाएगा। उन्होंने प्रभावित लोगों के लिए नए मकान बनवाने और स्थायी आवास की व्यवस्था होने तक अस्थायी रूप से रहने तथा भोजन-पानी की सुविधा सुनिश्चित करने की बात कही।
घरों के साथ फसल और पानी का संकट भी
कोसमी गांव की कार्रवाई को लेकर उठे सवाल केवल आवास तक सीमित नहीं हैं। प्रभावित परिवारों की मक्का और तुअर की फसलों को नुकसान पहुंचने तथा पानी के लिए उपयोग किए जाने वाले कुएं में मिट्टी भरने की बात भी सामने आई है। इससे ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों और आजीविका को लेकर मुश्किलें खड़ी होने की चिंता जताई जा रही है।
अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर होने वाली जांच इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच में कार्रवाई की परिस्थितियों, जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका और प्रभावित परिवारों को हुए नुकसान जैसे पहलुओं की पड़ताल किए जाने की उम्मीद है। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि आदिवासी परिवारों को राहत और आवास उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन कितनी जल्दी ठोस कदम उठाता है।