सरकार का बड़ा दांव! 413 निकायों में एक साथ होगी एल्डरमैन की नियुक्ति

Edited By Himansh sharma, Updated: 26 Mar, 2026 01:32 PM

mp to appoint aldermen first police check after

मध्य प्रदेश में नगरीय राजनीति को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है।

भोपाल: मध्य प्रदेश में नगरीय राजनीति को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला सामने आया है। मध्य प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) की नियुक्ति को लेकर सरकार ने अहम रणनीति तय कर ली है। खास बात यह है कि इस बार पहले नियुक्ति आदेश जारी किए जाएंगे और उसके बाद पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

सूत्रों के अनुसार, करीब 1800 से ज्यादा नामों की फाइनल सूची पर मुहर लग चुकी है और आदेश आज या कल में जारी हो सकते हैं। यह फैसला प्रशासनिक प्रक्रिया को तेज करने के उद्देश्य से लिया गया है, जिसमें कार्योत्तर अनुमोदन बाद में लिया जाएगा।

क्या है पूरा प्लान?

सरकार ने अलग-अलग निकायों के लिए एल्डरमैन की संख्या भी तय कर दी है—

नगर निगम (16) – 8 से 10 एल्डरमैन
नगर पालिका (99) – 6 एल्डरमैन
नगर परिषद (298) – 4 एल्डरमैन

इस फॉर्मूले के तहत कुल मिलाकर 1800 से ज्यादा एल्डरमैन नियुक्त किए जाएंगे। बड़े शहर जैसे भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में विशेष रूप से ज्यादा नियुक्तियां होंगी।

किन्हें मिलेगी प्राथमिकता?

इस बार ऐसे नेताओं और कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता दी गई है—

जिन्हें नगर निकाय प्रशासन का अनुभव है..

जो नगर पालिका अधिनियम की समझ रखते हैं..

संगठन से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं..

विधायकों से नाम मंगवाकर सूची तैयार की गई है, जिसमें अन्य दलों से आए नेताओं को भी समायोजित किया गया है।

चुनावी रणनीति से जुड़ा फैसला

साल 2027 में होने वाले नगरीय निकाय चुनाव को देखते हुए यह नियुक्तियां काफी अहम मानी जा रही हैं। एल्डरमैन को करीब सवा साल का समय मिलेगा, जिससे वे संगठन और क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत कर सकें।

क्या होते हैं एल्डरमैन?

एल्डरमैन परिषद की बैठकों में शामिल होकर चर्चा में भाग ले सकते हैं, लेकिन—

उन्हें मतदान का अधिकार नहीं होता

उनका कार्यकाल परिषद के कार्यकाल के बराबर होता है

क्यों खास है यह फैसला?

यह पहली बार है जब नियुक्ति से पहले पुलिस वेरिफिकेशन नहीं किया जा रहा, बल्कि प्रक्रिया उलटी अपनाई गई है। इससे साफ है कि सरकार तेजी से राजनीतिक और प्रशासनिक संतुलन बनाने में जुटी है। कुल मिलाकर, यह फैसला न सिर्फ प्रशासनिक बल्कि आने वाले चुनावों की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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