Edited By meena, Updated: 31 Oct, 2026 02:29 PM

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लोकायुक्त सागर की टीम ने हाल ही में मझगांय मध्यम परियोजना...
पन्ना (टाइगर खान) : मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में जल संसाधन विभाग के भीतर भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला सामने आया है, जहां लोकायुक्त सागर की टीम ने हाल ही में मझगांय मध्यम परियोजना के कैनाल स्लूस निर्माण कार्य के अंतिम भुगतान के एवज में बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान लोकायुक्त ने संभागीय लेखा अधिकारी दीपक सिंह परमार को 15 हजार और सहायक ग्रेड-2 अरविंद कुमार पाठक को 30 हजार रुपये यानी कुल 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों गिरफ्तार किया था। इस सनसनीखेज कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप मच गया और प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे।
इस पूरी घटना के बीच जल संसाधन संभाग पन्ना के कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार का एक बेहद चौंकाने वाला, गैर-जिम्मेदाराना और अमर्यादित बयान सामने आया, जिसने शासन-प्रशासन की जमकर किरकिरी करा दी। मीडिया कर्मियों से चर्चा के दौरान ईई अहिरवार ने कैमरे पर बेशर्मी से स्वीकार किया कि रिश्वत मांगना भले ही गलत हो और उनका कोई फिक्स प्रतिशत तय न हो, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी खुशी से या प्यार से उन्हें कुछ दे देता है, तो वे उसे रख लेते हैं। उनके इस विवादित बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर जंगल की आग की तरह वायरल हो गया, जिसके बाद शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों ने इसे बेहद गंभीरता से लिया।
मामले की नजाकत को देखते हुए मध्य प्रदेश शासन के जल संसाधन विभाग, वल्लभ भवन भोपाल ने त्वरित कदम उठाते हुए आज शुक्रवार 30 अक्टूबर को निलंबन का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि कार्यपालन यंत्री सी.बी. अहिरवार द्वारा मीडिया के सामने दिया गया यह बयान उनकी कदाचरण की खुली स्वीकारोक्ति है, जो मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 का सीधा उल्लंघन है। इस गंभीर अनुशासनहीनता और अशोभनीय आचरण को आधार बनाते हुए राज्य सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन की इस अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय प्रमुख अभियंता, जल संसाधन विभाग, भोपाल नियत किया गया है, ताकि प्रशासनिक शुचिता और अनुशासन बनाए रखा जा सके।