मध्यप्रदेश में लोग कमलनाथ-दिग्विजय की जोड़ी की वापसी नहीं चाहते हैं: प्रदेश भाजपा अध्यक्ष

Edited By PTI News Agency, Updated: 12 Oct, 2020 08:13 PM

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भोपाल, 12 अक्टूबर (भाषा) मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने दावा कि पिछले सात माह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा कराये गये विकास कार्यों के आधार पर भाजपा प्रदेश में होने जा रहे उपचुनाव में सभी 28 सीटों पर...

भोपाल, 12 अक्टूबर (भाषा) मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा ने दावा कि पिछले सात माह में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की सरकार द्वारा कराये गये विकास कार्यों के आधार पर भाजपा प्रदेश में होने जा रहे उपचुनाव में सभी 28 सीटों पर विजय हासिल करेगी।

उपचुनाव के तहत मध्यप्रदेश में 28 विधानसभा सीटों पर तीन नवंबर को मतदान तथा 10 नवंबर को मत गणना होगी।

शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान ने प्रदेश के कुछ हिस्सों में हाल ही में आई बाढ़ जैसी अन्य चुनौतियों के साथ प्रदेश में कोविड-19 की महामारी के प्रकोप को नियंत्रित करने में भी अच्छा काम किया है।

उन्होंने कहा कि भाजपा का चुनाव प्रचार कांग्रेस के 15 माह के शासन और मुख्यमंत्री चौहान के सात माह के कार्यकाल में कराये गये विकास कार्यों पर आधारित होगा।

उन्होंने कहा कि अनुसूचित जाति/ अनुसूचित जनजाति/ अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और मुस्लिम वर्ग जैसा परंपरागत कांग्रेस का मतदाता भी भाजपा की तरफ हो गया है तथा उपचुनाव में मायावती की अगुवाई वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की मौजूदगी भी भाजपा की संभावनाओं को प्रभावित नहीं कर सकेगी।

शर्मा ने कहा कि डॉ बीआर आंबेडकर और भारतीय जन संघ के नेता पंडित दीन दयाल उपाध्याय के विचारों को आधार बनाकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया है।

अगर पूरे देश में समाज के गरीब, दलित और वंचित वर्ग के लिये बाबा साहब अंबेडकर के विचारों के अनुसार किसी ने ध्यान रखकर और उसकी चिंता की है तो वह प्रधानमंत्री मोदी की सरकार ने की है।

शर्मा ने ‘पीटीआई -भाषा’ को एक साक्षात्कार में कहा, ‘‘मोदी सरकार ने उज्ज्वला योजना (गरीब परिवारों को मुफ्त में रसोई गैस प्रदान करना) स्वामित्व (संपत्ति कार्ड जारी करना) तथा प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाएं लागू की हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘आठ करोड़ बेघरों के लिये पक्के मकान बनाये गये हैं। तीन करोड़ परिवारों को उज्ज्वला योजना के तहत एलपीजी कनेक्शन दिये गये। इससे महिलाओं को आंबेडकर और पंडित उपाध्याय के सपने के अनुसार सम्मान से जीने का अधिकार मिला है।’’ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि इन कल्याणकारी योजनाओं के कारण कांग्रेस यहां तक कि बसपा का परंपरागत वोटों का एक बड़ा हिस्सा भाजपा की ओर आ गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘ कांग्रेस ने अपने 50 साल की शासन में एसटी/ एससी और मुस्लिमों को सिर्फ अपना वोट बैंक माना और उनके कल्याण के लिये कुछ नहीं किया।’’ उन्होंने कहा कि यहां तक कि पंचतीर्थ परियोजना को मोदी सरकार द्वारा पूरा किया गया। इसके तहत आंबेडकर से जुड़े पांच स्थानों को विकसित किया गया है।

भाजपा को विभिन्न समुदायों विशेष कर अनुसूचित जाति वर्ग से मिलने वाले समर्थन का उदाहरण देते हुए उन्होने कहा कि रीवा संभाग में भाजपा को वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 30 सीटों में से 24 पर विजय हासिल हुई।

उन्होंने कहा कि ग्वालियर चंबल संभाग में भी मोदी सरकार द्वारा इन वर्गों के पक्ष में चलाई गयी कल्याण योजनाओं और विकास कार्यो के आधार पर कांग्रेस और बसपा के इन परंपरागत मतदाताओं के बीच भाजपा को अच्छा समर्थन हासिल हो रहा है।

प्रदेश में होने जा रहे 28 सीटों के उपचुनाव में अधिकांश सीटें ग्वालियर- चंबल क्षेत्र में आती हैं। वर्ष 2018 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने प्रदेश में दो सीटें जीती थीं।

कांग्रेस के 25 विधायकों द्वारा विधायक पद और कांग्रेस से त्यागपत्र देने के बाद भाजपा में शामिल होने से 25 सीटें रिक्त हुई जबकि दो कांग्रेस और एक भाजपा के विधायक के निधन होने से तीन सीटें रिक्त हुयीं।

शर्मा ने कहा, ‘‘ ज्योतिरादित्य सिंधिया (पूर्व केन्द्रीय मंत्री) के भाजपा में शामिल होने से भाजपा की ताकत बढ़ी है। यह पार्टी के कार्यकर्ताओं ने भी महसूस किया है और वह सभी की सभी 28 सीटों पर पार्टी की जीत सुनिश्चित करने में लग गये हैं।’’ कांग्रेस विधायकों के एक वर्ग में विद्रोह होने से 15 माह पुरानी कमलनाथ के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार मार्च माह में गिर गयी थी। इसके बाद शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में भाजपा की सरकार प्रदेश में बनी।

कांग्रेस के आरोप कि भाजपा ने नोट की ताकत से यह उपचुनाव जनता पर थोपा है, के सवाल पर शर्मा ने कहा कि इस आरोप में कोई सच्चाई नहीं है।

भाजपा नेता ने कहा, ‘‘यह सच नहीं है। कांग्रेस सरकार गिर गयी क्योंकि इसने विकास की अनदेखी की और लोगों से किये गये वादों को पूरा नहीं किया।’’ शर्मा ने कहा कि कांग्रेस सरकार दिग्विजय सिंह द्वारा चलाई जा रही थी, न कि मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा। कमलनाथ प्रदेश के बजाय केवल अपने निर्वाचन क्षेत्र छिंदवाड़ा पर ही ध्यान रखते थे। जब भी मंत्री, विधायक किसी काम से कमलनाथ से मिलने जाते थे तो वह उन्हें अक्सर जाने को कह देते थे क्योंकि उनके पास केवल व्यापारियों के लिये समय होता था।

शर्मा ने कहा कि कांग्रेस में रहते जब सिंधिया ने अतिथि शिक्षकों को नियमित करने का मुद्दा उठाया तो कमलनाथ ने उनसे (सिंधिया) सड़क पर उतरने के लिये कह दिया।

मार्च माह में कांग्रेस से त्यागपत्र देकर भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों में से अधिकांश विधायक सिंधिया के समर्थक ही थे।

शर्मा ने कहा, ‘‘ कांग्रेस के 15 माह के शासन के विपरीत चौहान के नेतृत्व में भाजपा सरकार ने कोविड-19 की स्थिति और हाल की बाढ़ में राहत कार्यो को जिस प्रकार संभाला वह सराहनीय है। भाजपा सरकार ने पिछले पांच-छह माह में प्रदेश के विकास के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘इसलिये लोग उपचुनाव में निश्चित तौर पर कांग्रेस को खारिज कर देंगे क्योंकि वे कमलनाथ-दिग्विजय की जोड़ी के शासन को किसी भी परिस्थिति में वापस नहीं आने देना चाहते हैं।’’ शर्मा ने कहा कि लोग जानते हैं कि चौहान ने पद संभालनें के बाद कैसे कोविड-19 की स्थिति से निपटा है और लोगों ने उन्हें राहत अभियान में नावों में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करते हुए देखा है।

भाजपा कार्यकर्ताओं को नज़रअंदाज़ कर उपचुनाव में सिंधिया समर्थकों को टिकट दिये जाने के सवाल पर शर्मा ने कहा कि सिंधिया की पृष्ठभूमि भाजपा की है। उनकी दादी राजमाता विजयाराजे सिंधिया ने जनसंघ और भाजपा का पोषण किया। उनके पिता स्वर्गीय माधवराव सिंधिया ने जनसंघ के सांसद के तौर पर अपनी राजनीति शुरू की।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस की स्थिति देखने और प्रदेश के विकास के लिये उन्होंने (ज्योतिरादित्य सिंधिया) भाजपा में शामिल होने का फैसला किया।

यह आर्टिकल पंजाब केसरी टीम द्वारा संपादित नहीं है, इसे एजेंसी फीड से ऑटो-अपलोड किया गया है।

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