Edited By Desh Raj, Updated: 26 Feb, 2026 10:54 PM
मध्य प्रदेश में बीजेपी लंबे समय से सत्ता पर काबिज है। लगातार सत्तासीन बीजेपी जहां राज्य में लगातार मजबूत होती जा रही है वहीं कांग्रेस भी बीजेपी का मुकाबला करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है और शायद कोई ही मुद्दा हो जिस पर कांग्रेस बीजेपी पर निशाना...
(भोपाल): मध्य प्रदेश में बीजेपी लंबे समय से सत्ता पर काबिज है। लगातार सत्तासीन बीजेपी जहां राज्य में लगातार मजबूत होती जा रही है वहीं कांग्रेस भी बीजेपी का मुकाबला करने के लिए हर संभव कोशिश कर रही है और शायद कोई ही मुद्दा हो जिस पर कांग्रेस बीजेपी पर निशाना न साधती हो। लेकिन फिर भी बीजेपी चुनावों में कांग्रेस पर भारी पड़ ही जाती है। प्रदेश में लगातार हारों के बाद भी कांग्रेस का मनोबल टूटा नहीं है और वो अब प्रदेश में वापसी और मजबूती के लिए नई रणनीती पर काम कर रही है। दरअसल अब कांग्रेस बीजेपी से मुकाबले के नए और उर्जावान चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है।
काफी समय तक कांग्रेस की कमान संभालने वाले और सीएम रहे कमलनाथ के नेतृत्व वाले मॉडल पर अब कहीं न कहीं सवाल उठने शुरु हो गए हैं। संगठन को लगता है अब रणनीति और दूसरे नेताओं को मौका देने की जरुरत है। ऐसे में पार्टी आलाकमान नए नेतृत्व के साथ ही युवा और आक्रामक चेहरों को आगे लाने पर मंथन कर रहा है।
कांग्रेस का विचार है कि पुराने अनुभव के साथ नए नेताओं को मौका देकर बीजेपी से मुकाबला किया जाए। इसी कड़ी में पार्टी लगातार काम कर भी रही है जो साफ दिख रहा है। आने वाले समय में भी बदलाव और नई जिम्मेदारियों के ऐलान से कांग्रेस चौंका सकती है। इससे इंकार नही किया जा सकता है कि कांग्रेस के पास मध्य प्रदेश में कई ऐसे युवा, आक्रामक और उर्जावान चेहरे हैं जो पार्टी की धार और रफ्तार को तेज कर सकते हैं। इस कड़ी में जिन नेताओं के नाम प्रदेश में सुनाई देते हैं और उनका काम बोलता है वो इस तरह से हैं..
1- प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी
जी हां मध्य प्रदेश कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी की आक्रामकता और कार्यशैली किसी से छिपी नहीं है। वो किसी भी मुद्दे को अपने अंदाज और तरीके से उठाते हैं जिससे हलचल को पैदा हो ही जाती है। कमलनाथ की अगुवाई में पिछला विधानसभा चुनाव कांग्रेस हार गई थी, और 66 के करीब सीटों पर कांग्रेस का संख्या सिमट गई थी।
इसके बाद पार्टी ने बड़ा फैसला लेते हुए MP की कमान जीतू पटवारी को सौंपकर बड़ा इशारा दे दिया था। ये उस वक्त हालांकि किसी ने सोचा नहीं था कि कमलनाथ से कमान लेकर पटवारी को सौंपी जाएगी लेकिन इस बदलाव से बड़ा संदेश गया था कि अब पार्टी कमलनाथ माडल को छोड़कर आगे बढ़ने की सोच रही है। हालांकि 2023 के चुनाव में जीतू पटवारी खुद अपनी सीट हार गए थे, लेकिन उनकी काबलियत और आक्रामकता को देखकर प्रदेश अध्यक्ष का कमान सौंप दी गई थी।
वैसे भी जातू पटवारी राहुल गांधी के करीबी माने जाते हैं, कहा ये भी जा रहा है कि जीतू पटवारी की सलाह के बाद ही राहुल गांधी ने यूएस-इंडिया ट्रेड डील के विरोध में भोपाल में आयोजित किसान चौपाल को संबोधित करने आए थे। पहले किसान महाचौपाल हरियाणा में होने की चर्चा थी, लेकिन जीतू पटवारी की सलाह की तरजीह देते हुए राहुल भोपाल पहुंच गए थे।
2- उमंग सिंघार
प्रदेश में दूसरे नेता जो प्रभाव रखते हैं वो हैं नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार। जी हां आदिवासी समाज से प्रमुख चेहरे के तौर पर सिंघार पहचाने जाते हैं। आदिवासियों के लिए आरक्षित 47 सीटों प्रदेश के सत्ता को बनने और बिगाडने का माद्दा रखती हैं। इस वोट बैंक को जो साथ लेकर चल सकता है औऱ साध सकता है उसमें उमंग सिंघार का नाम ऊपर आता है।
3-जयवर्धन सिंह
पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह के सपुत्र जयवर्धन सिंह भी प्रदेश की राजनीति में अपना अलग रुतवा रखते हैं औऱ राजनीति को प्रभावित करने वाले नेता हैं। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जयवर्धन सिंह कमलनाथ सरकार में सबसे युवा मंत्री के तौर पर सेवाएं दे चुके हैं। उनका कितना प्रभाव है इसका एक उदाहरण ये भी है कि वो कुछ समय के लिए विधायक होते हुए भी जिलाध्यक्ष बनाए गए थे। जाहिर है कांग्रेस जयवर्धन सिंह जैसे प्रतिभाशाली नेता को भी अप्पर हैंड देकर प्रदेश की राजनीति में उनका अच्छे से प्रयोग कर सकती है।
4-हेमंत कटारे
पिछले दिनों उपनेता विधानसभा के पद को छोड़ने वाले हेमंत कटारे कांग्रेस के तेज तर्रार नेता माने जाते हैं। कटारे ब्राह्मण समाज से आते हैं और अपनी जिंदादली के लिए जाने जाते हैं। हालांकि कटारे ने विधानसभा में उपनेता पद छोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने साफ कर दिया है कि वो बिना पद के लड़ाई लड़ने वाले दमदार नेता हैं। कटारे की प्रतिभा और आक्रामकता को देखते हुए उनपर कांग्रेस दांव लगा सकती है।
वहीं बात करें और एक और नेता कि दो कांग्रेस के लिए फायदेमंद हो सकते हैं तो वो हैं सचिन यादव, जो ओबीसी वोटरों को लुभाने में कांग्रेस का फायदा करा सकते हैं। ओबीसी वोट बैंक में पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस सचिन यादव को मौका दे सकती है ।
इस तरह से साफ है कि कांग्रेस प्रदेश में अब पुराने नेतृत्व से बाहर निकलकर युवा, आक्रामक और जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए नए चेहरों को मौका देने के मूड में हैं। इसकी एक झलक हाल ही में हुई नियुक्तियों में भी दिखती है।
इसके साथ ही कांग्रेस में प्रवक्ता बनने के लिए अब नई प्रक्रिया शुरु की गई है। प्रदेश में अब कांग्रेस प्रवक्ता बनने के लिए टैलेंट हंट जैसी प्रक्रिया से गुजरना होगा। जीतू पटवारी जानते हैं कि मीडिया और लोगों के सामने तथ्य और बात को मजबूत ,प्रभावी तरीके से रखने में प्रवक्ताओं की कितनी अहम भूमिका होती है। लिहाजा साफ है कि बीजेपी से सामना करने के लिए कांग्रेस नए तेवर और क्लेवर में तैयार हो रही है। पुराने चेहरों के बदले अब तेज तर्रार, युवा, आक्रामक और प्रभावशाली नेताओं पर दांव लगाकर पार्टी सत्ता वापसी की राह देख रही है।