डीजल-खाद संकट पर बरसे रविंद्र चौबे, बोले- किसान परेशान, सरकार जवाब दे

Edited By meena, Updated: 15 May, 2026 08:14 PM

ravindra choubey lashes out at government over diesel and fertilizer crisis

प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और खाद की किल्लत को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा कि खेती-किसानी के अहम समय में किसानों को जरूरी संसाधन नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है...

धमधा (हेमंत पाल) : छत्तीसगढ़ के पूर्व कृषि मंत्री रविंद्र चौबे ने अपने एक दिवसीय दौरे के दौरान धमधा क्षेत्र पहुंचकर केंद्र और राज्य सरकार की नीतियों पर जमकर हमला बोला। मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने प्रदेश में पेट्रोल-डीजल और खाद की किल्लत को लेकर गंभीर चिंता जताई और कहा कि खेती-किसानी के अहम समय में किसानों को जरूरी संसाधन नहीं मिलना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है।

रविंद्र चौबे ने कहा कि राजधानी रायपुर सहित बेमेतरा जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर डीजल की स्थिति “ड्राई” बनी हुई है। ऐसे समय में जब किसान खेतों की तैयारी, जोताई और मांदा बनाने जैसे कृषि कार्यों में जुटे हुए हैं, डीजल की कमी उनके सामने बड़ी समस्या बन गई है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसानों को समय पर डीजल नहीं मिलेगा तो आखिर वे खेती कैसे करेंगे?

पूर्व मंत्री ने भाजपा नेताओं के बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि भाजपा के एक नेता यह बयान दे रहे हैं कि अभी कृषि कार्य का समय नहीं आया है और मानसून के बाद खेती शुरू होती है। चौबे ने कहा कि ऐसा बयान बताता है कि उन्हें खेती-किसानी की जमीनी समझ नहीं है। किसान अभी से खेत तैयार करने में जुटे हुए हैं और ऐसे समय में इस तरह की बयानबाजी किसानों का अपमान है।

खाद संकट पर बोलते हुए चौबे ने कहा कि फर्टिलाइजर की समस्या प्राकृतिक नहीं बल्कि कृत्रिम रूप से पैदा हुई स्थिति है। उन्होंने कहा कि जब देश में खाद, पेट्रोल, डीजल और गैस जैसी मूलभूत जरूरतों की कमी होने लगे तो आम जनता आखिर कहां जाएगी।

विदेश नीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत के पुराने मित्र देशों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर देश की आर्थिक स्थिति और आम जनता पर दिखाई दे रहा है। चौबे ने प्रधानमंत्री से मांग करते हुए कहा कि देशहित और किसानों के हित में नीतियों में बदलाव की जरूरत है, ताकि किसान और आम नागरिक राहत महसूस कर सकें। पूर्व मंत्री के इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर किसानों के मुद्दे पर सियासी बहस तेज होने के आसार हैं।

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