भूत प्रेत में विश्वास नहीं करने वाले एक बार जरूर देखें यह वीडियो (Video)

Edited By meena, Updated: 30 Jan, 2021 01:48 PM

बहुत से लोग भूत-प्रेत, आत्म आदि में विश्वास नहीं करते और इसे अंधविश्वास मानते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मलाजपुरा में भूतों का मेला लगता है। जहां डॉक्टर, इंजीनियर जैसे पढ़े लिखे लोग भी झाड़फूंक करवाने आते हैं। हर साल की तरह मलाजपुर गांव...

बैतूल(अमित पवार): बहुत से लोग भूत-प्रेत, आत्म आदि में विश्वास नहीं करते और इसे अंधविश्वास मानते हैं। लेकिन मध्य प्रदेश के बैतूल जिले के मलाजपुरा में भूतों का मेला लगता है। जहां डॉक्टर, इंजीनियर जैसे पढ़े लिखे लोग भी झाड़फूंक करवाने आते हैं। हर साल की तरह मलाजपुर गांव में इस साल भी हजारों लोग भूतों के मेले में शामिल होने  पहुंचे हैं। मेले का शुभारंभ प्रदेश शासन के कृषि मंत्री कमल पटेल ने किया। इस मेले के बारे में कहा जाता है कि यहां संत गुरूसाहब बाबा की समाधि स्थल पर कथित तौर पर भूत प्रेतों से पीड़ित लोगों का झाड़ फूंक के जरिये इलाज हो जाता है और लोग भूतों से निजात पा लेते हैं। इस मेले में महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को ठीक करने के लिये झाड़ू से झाड़ा जाता है। हर साल आस्था और अंधविश्वास की बहस के बीच ये भूतों का मेला जारी है । 

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बैतूल के मलाजपुर गांव के गुरुसाहब बाबा का दरबार में महिलाओं को डायन, चुड़ैल, पिशाचिनी और पुरुषों को दैत्य, जिन्नाद और ना जाने कितने ही  शब्दों से पुकारा जाता है। बात यहीं खत्म नहीं होती, यहां लोगों के शरीर में कथित तौर पर मौजूद भूत प्रेतों को निकालने के लिये पीड़ितों को बाल पकड़कर घसीटने से लेकर झाड़ू से पिटाई तक की जाती है। अगर आप भी जिंदा भूत प्रेत देखना चाहते हैं तो यह नजारा मलाज पुर में देखा जा सकता है।  

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बैतूल वासियों के मुताबिक  इस दरबार का इतिहास 400 साल पुराना है और यहां संत गुरुसाहब की समाधी है जहां सदियों से भूत प्रेत उतारने का काम होते आ रहा है। वहीं गुरुसाहब बाबा के बारे में ये बताया जाता है कि वो राजस्थान से आए थे और फिर बैतूल के मलाजपुर में ही बस गए।

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यहां गुरुसाहब बाबा ने अपनी चमत्कारी शक्तियों से भूत प्रेत से पीड़ित लोगों का इलाज शुरु किया। गुरुसाहब के समाधी लेने के बाद भी यहां कथित भूतप्रेतों से पीड़ित लोगों का आना जारी है। यहां के प्रबन्धन का कहना है कि भूत कई तरह के होते हैं लेकिन इन्हें निकालने के लिये गुरुसाहब बाबा की एक झाड़ू काफी है। दूर-दूर से यहां लोग आते है और प्रेत बाधाओं से मुक्ति पाते है। 

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अब तक ये माना जाता था कि अशिक्षित और अंधविश्वासी लोग ही भूत प्रेतों को लेकर अतिवादी होते हैं लेकिन भूतों के इस मेले मेले में पढ़े लिखे डॉक्टर, इंजीनियर सरीखे लोग भी आते हैं। इनकी माने तो लोग कई बार होने वाली बहस के बावजूद यहां लोगों की गहरी आस्था है।

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इसलिए ये मेला जारी है। कोरोना संक्रमण को देखते हुए इस बार प्रशासन ने यहां खास बंदोबस्त किए हैं। मेला क्षेत्र में मास्क और सेनेटाइजर का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया है । अब लोग नियमों का कितना पालन करेंगे ये देखने वाली बात है ।

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