Edited By meena, Updated: 03 Apr, 2026 02:33 PM

आगामी जून में मध्यप्रदेश की तीन सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव के पहले तीन विधायकों को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के दतिया से विधायक राजेंद्र भारती को कल...
भोपाल : आगामी जून में मध्यप्रदेश की तीन सीटों के लिए होने वाले राज्यसभा चुनाव के पहले तीन विधायकों को लेकर कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ती हुई दिखाई दे रही हैं। कांग्रेस के दतिया से विधायक राजेंद्र भारती को कल नयी दिल्ली की एक अदालत की ओर से तीन साल के लिए सजा सुनाए जाने के बाद मध्यप्रदेश विधानसभा ने राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द कर दी है। ऐसे में अब वे आगामी राज्यसभा चुनाव में मतदान नहीं कर पाएंगे। इसके पहले कांग्रेस के एक और विधायक मुकेश मल्होत्रा को भी एक मामले में उच्चतम न्यायालय राज्यसभा चुनाव में मतदान से वंचित कर चुका है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर बेंच ने एक आपराधिक प्रकरण को छिपाने के मामले में श्योपुर जिले के विजयपुर विधायक मुकेश मल्होत्रा का चुनाव शून्य घोषित कर दिया था। मुकेश मल्होत्रा ने उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया, जहां फैसला उनके पक्ष में आया। इसके साथ ही उनकी सदस्यता बच गई, लेकिन न्यायालय ने इसके लिए कई शर्तें रख दीं, जिसके मुताबिक मुकेश मल्होत्रा राज्यसभा चुनाव में वोट नहीं डाल पाएंगे। वहीं बीना से कांग्रेस विधायक निर्मला सप्रे पहले ही अपने रुख के कारण कांग्रेस को मुश्किल में डाल चुकी हैं। निर्मला सप्रे लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी के मंचों पर दिखाई दे रही हैं, हालांकि उन्होंने कभी भी भाजपा में होने और कांग्रेस का दामन छोड़ने की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है, लेकिन विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार समेत कांग्रेस के अन्य नेता उनके रुख पर लगातार सवाल उठा रहे हैं।
सिंघार निर्मला सप्रे के खिलाफ अदालत चले गए हैं और उनकी विधायकी शून्य करने की बात कही है। हालांकि निर्मला सप्रे ने पिछले दिनों एक बार फिर ये कहते हुए सुर्खियां बटोरीं कि वे अब भी कांग्रेस में ही हैं। इसी बीच कल विधानसभा सचिवालय की ओर से राजेंद्र भारती की सदस्यता निरस्त किए जाने का आदेश जारी कर दिया गया है। कल देर रात इससे जुड़ा एक नाटकीय घटनाक्रम भी हुआ। देर रात लगभग साढ़े 10 बजे विधानसभा सचिवालय खुला होने की सूचना मिलने पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और पूर्व मंत्री पी सी शर्मा सचिवालय पहुंचे। दोनों नेताओं ने आरोप लगाया कि इतनी देर रात विधानसभा सरकार के दबाव के कारण खोली गई है, ताकि राजेंद्र भारती की सदस्यता रद्द की जा सके।
वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी इस घटनाक्रम को लेकर बयान जारी करते हुए कहा,‘‘आधी रात में भाजपा के काले कारनामे! जब मामला न्यायालय में है और अपील के लिए समय दिया गया है, तो फिर इतनी जल्दबाजी क्यों? दतिया से कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती जी के मामले में आधी रात को विधानसभा सचिवालय खोलकर उनकी विधायकी समाप्त कर दी गई।‘‘ उन्होंने कहा कि राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा हर संभव प्रयास कर रही है कि विपक्ष के विधायकों को किसी भी तरह प्रक्रिया से बाहर किया जाए, चाहे वह दबाव हो, पुराने मामलों को हवा देना हो या फिर इस तरह की जल्दबाजी में कार्यवाही। जो हथकंडे अपनाए जा रहे हैं, उन्हें खुलकर राजनीतिक दुर्भावना और सत्ता का दुरुपयोग ही कहा जाएगा। सिंघार ने कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी अपने विधायकों के साथ मजबूती से खड़ी है और हर स्तर पर, हर मंच पर, संवैधानिक और कानूनी तरीके से इस लड़ाई को लड़ेगी। मध्यप्रदेश की 230 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के 164 और कांग्रेस के 64 सदस्य हैं। एक सदस्य कमलेश डौडियार भारत आदिवासी पार्टी के सदस्य हैं। एक सीट रिक्त घोषित है। राज्य में राज्यसभा की तीन सीटों के लिए जून में चुनाव होना है। सदस्यों की संख्या के आधार पर इनमें से दो भाजपा के खाते में जाने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।