राज्यसभा के लिए उम्मीदवार उतारेगी तीसरी पार्टी, MLA ने कर दिया ऐलान, कहा- कांग्रेस-भाजपा हमें दे समर्थन

Edited By meena, Updated: 20 Mar, 2026 12:43 PM

the bharat adivasi party will field candidates for the rajya sabha

मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनावों को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। इसी बीच प्रदेश की राजनीति में बीएपी (BAP) विधायक के बयान से हड़कंप मचा हुआ है। विधायक ने राज्यसभा में उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है...

भोपाल : मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनावों को लेकर सियासी घमासान छिड़ा हुआ है। इसी बीच प्रदेश की राजनीति में बीएपी (BAP) विधायक के बयान से हड़कंप मचा हुआ है। विधायक ने राज्यसभा में उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है। बता दें कि प्रदेश में राज्यसभा की तीन सीटों पर चुनाव होने हैं। बीजेपी के केन्द्रीय मंत्री एल मुरुगन, डॉ सुमेर सिंह सोलंकी और कांग्रेस के दिग्विजय सिंह का कार्यकाल 19 जून को खत्म हो रहा है। ऐसे में विधायक कमलेश्वर डोडियार के बयान से सियासत गरमा गई है।

क्या कहा विधायक ने?

रतलाम जिले की सैलाना सीट से विधायक कमलेश्वर डोडियार ने साफ कहा कि भारत आदिवासी पार्टी (BAP) राज्यसभा चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारने की तैयारी कर रही है। डोडियार का तर्क है कि बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही आदिवासी क्षेत्रों में जाकर समर्थन मांगती हैं। ऐसे में उन्हें राज्यसभा में भी आदिवासी आवाज को जगह देनी चाहिए। इसलिए तीन सीटों में से एक सीट पर BAP उम्मीदवार को समर्थन मिलना चाहिए। यह मांग सीधे तौर पर राजनीतिक प्रतिनिधित्व बनाम वोट बैंक राजनीति की बहस को सामने लाती है।

बड़ी चुनौती क्या है?

राज्यसभा चुनाव में उम्मीदवार खड़ा करने के लिए कम से कम 10 विधायकों का समर्थन जरूरी होता है। जबकि BAP के पास अभी केवल 1 विधायक है यानी पार्टी को या तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) या भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (Congress)का समर्थन लेना पड़ेगा — जो राजनीतिक रूप से आसान नहीं माना जाता।

राजनीतिक संदेश क्या है?

डोडियार का बयान सिर्फ चुनावी रणनीति नहीं, बल्कि आदिवासी राजनीति को राष्ट्रीय मंच पर लाने की कोशिश के साथ साथ बड़े दलों पर नैतिक दबाव बनाने की रणनीति और अपनी पार्टी की पहचान मजबूत करने का प्रयास भी है।

भले ही BAP के लिए गणित मुश्किल हो, लेकिन यह कदम आदिवासी प्रतिनिधित्व के मुद्दे को चर्चा में लाता है और राज्यसभा चुनाव को सिर्फ संख्या का खेल नहीं, बल्कि सामाजिक प्रतिनिधित्व का सवाल भी बना देता है।

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