Edited By Desh Raj, Updated: 23 May, 2026 07:37 PM

इंदौर में हनीट्रैप मामले में नए नए खुलासे सामने आ रहे हैं । दरअसल जेल में बनी श्वेता और अलका की दोस्ती बाहर आकर एक संगठित हनीट्रैप गैंग में बदल गई। दोनों ने मिलकर कारोबारियों और राजनीतिक संबंध वाले लोगों को जाल में फंसाना शुरू किया
इंदौर (सचिन बहरानी): इंदौर में हनीट्रैप मामले में नए नए खुलासे सामने आ रहे हैं । दरअसल जेल में बनी श्वेता और अलका की दोस्ती बाहर आकर एक संगठित हनीट्रैप गैंग में बदल गई। दोनों ने मिलकर कारोबारियों और राजनीतिक संबंध वाले लोगों को जाल में फंसाना शुरू किया। बदनामी के डर से कई पीड़ित सामने नहीं आ रहे, जिससे गैंग लंबे समय तक सक्रिय रहा। पुलिस अब पीड़ितों की पहचान और गैंग की पूरी नेटवर्किंग खंगाल रही है। हालांकि क्राइम ब्रांच के डीसीपी छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और रसूखदारों को हनी ट्रैप किए जाने से इंकार कर रहे हैं।
गिरफ्तारी के बाद जेल में मिली दो महिलाओं श्वेता और अलका की दोस्ती बाहर निकलने के बाद एक खतरनाक गैंग के रूप में विकसित हो गई। दोनों ने जेल से बाहर आने के बाद अपनी आपराधिक गतिविधियों को विस्तार दिया और एक संगठित हनीट्रैप नेटवर्क तैयार कर लिया, जिसका निशाना प्रदेश के प्रमुख शहरों के प्रमुख कारोबारी, संपन्न लोग और राजनीतिक संपर्क वाले व्यक्ति थे।
जेल में हुई थी श्वेता और अलका की पहली मुलाकात
जानकारी के अनुसार, श्वेता और अलका पहले अलग-अलग मामलों में गिरफ्तार होकर जेल पहुंचीं थीं। वहीं उनकी पहली मुलाकात हुई और दोनों ने मिलकर ऐसा प्लान तैयार किया, जो बाद में पुलिस के लिए भी चुनौती बन गया। जेल से बाहर आने के बाद दोनों ने सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और कॉलिंग के जरिए टारगेट चयन करना शुरू किया। ये महिलाएं पहले दोस्ती बढ़ातीं, फिर मुलाकात का बहाना बनाकर वीडियो-कॉल्स या निजी मुलाकातों के माध्यम से संवेदनशील कंटेंट तैयार करतीं और बाद में उसे ब्लैकमेलिंग के साधन के रूप में उपयोग करती थीं।
डीसीपी त्रिपाठी के मुताबिक क्राइम ब्रांच पुलिस की जांच में पता चला है कि कई ऐसे पीड़ित हैं, जिन्हें लाखों रुपए की मांगों का सामना करना पड़ा, लेकिन सामाजिक प्रतिष्ठा खराब होने के डर से उन्होंने शिकायत दर्ज नहीं कराई। इसी वजह से यह गैंग लगातार सक्रिय रहा और शहर में कई लोगों को मानसिक व आर्थिक रूप से परेशान करता रहा।
सूत्रों के मुताबिक गैंग के पास हाई-प्रोफाइल संपर्कों की एक लिस्ट भी मिली है, जिनका उपयोग वे नए टारगेट चुनने में करती थीं। पुलिस अब इन दोनों महिलाओं के कॉल डिटेल्स, बैंक लेनदेन और सोशल मीडिया चैट्स की गहराई से जांच कर रही है। डीसीपी त्रिपाठी का कहना है कि कई पीड़ित सामने आए तो मामले की असल गंभीरता और बड़े नेटवर्क का पूरा खुलासा हो सकेगा।
पुलिस सभी पीड़ितों से आगे आने की अपील कर रही है, ताकि इस गैंग की जड़ें पूरी तरह समाप्त की जा सकें। हालांकि उन्होंने पूरी घटना की जानकारी देते हुए छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और रसूखदारों को हनी ट्रैप किए जाने से इंकार कर किया है लेकिन यह भी कहा है कि इस मामले में देश की विभिन्न जांच एजेंसियों ने भी संज्ञान लिया है और एजेंसियां भी अपने स्तर पर जांच पड़ताल कर सकती हैं।
फिलहाल पुलिस दोनों महिलाओं के मोबाइल से मिले डेटा के आधार पर अन्य पीड़ितों को तलाश करने में लगी है, और दोनों ही आरोपियों श्वेता और अलका से जब्त मोबाइल रिकवर कर रहीं है, दोनों ही महिलाओं और अन्य सभी सात आरोपियों में से अधिकतर आरोपियों ने अपने मोबाइल फॉर्मेट कर दिए थे, अब देखना होगा कि क्या क्राइम ब्रांच इस हनी ट्रैप - 2 में अन्य पीड़ितों को सामने ला पाती हैं ?