हार के बाद उबल पड़े आशुतोष! बोले- बीजेपी को मां कहने वालों ने ही किया मजाक

Edited By Himansh sharma, Updated: 04 Aug, 2026 10:45 AM

datia bypoll ashutosh tiwari alleges internal sabotage

मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने सिर्फ सत्ता और विपक्ष के समीकरण नहीं बदले, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी गहरी हलचल पैदा कर दी है।

दतिया। मध्य प्रदेश के दतिया विधानसभा उपचुनाव के नतीजों ने सिर्फ सत्ता और विपक्ष के समीकरण नहीं बदले, बल्कि भारतीय जनता पार्टी के भीतर भी गहरी हलचल पैदा कर दी है। कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह की 6,016 वोटों से जीत के बाद भाजपा के अंदर भितरघात की चर्चा खुलकर सामने आने लगी है। अब तक चुप्पी साधे रहे भाजपा प्रत्याशी आशुतोष तिवारी ने पहली बार अपनी प्रतिक्रिया देते हुए संकेत दिया कि पार्टी को नुकसान बाहर से नहीं, बल्कि भीतर से पहुंचाया गया।

हार के बाद मीडिया से बातचीत में आशुतोष तिवारी ने बिना किसी नेता का नाम लिए कहा, बीजेपी को मां कहने वालों ने ही ऐसा मजाक किया। उनका यह बयान पार्टी के अंदर मौजूद असंतोष और कथित गुटबाजी की ओर इशारा माना जा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनाव परिणाम की पूरी समीक्षा की जाएगी और जो बातें सामने आएंगी, उन पर संगठन स्तर पर विचार होगा।

भितरघात के सवाल पर आशुतोष तिवारी ने साफ शब्दों में किसी व्यक्ति को जिम्मेदार नहीं ठहराया, लेकिन इतना जरूर कहा कि चर्चाएं यूं ही नहीं होतीं, धुआं उठा है तो आग भी होगी। उनके इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं और तेज हो गई हैं कि आखिर चुनाव के दौरान किस स्तर पर पार्टी को अंदरूनी नुकसान पहुंचा।

उधर, उपचुनाव परिणाम के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के बयान ने भी राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी। उन्होंने सक्रिय राजनीति से खुद को पीछे करने का संकेत देते हुए कहा कि मेरी राजनीति का पटाक्षेप हो गया है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे भाजपा के एक सामान्य कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए काम करते रहेंगे और पार्टी के प्रति उनकी निष्ठा पहले जैसी ही रहेगी।

दतिया उपचुनाव से पहले टिकट वितरण को लेकर भाजपा में असंतोष खुलकर सामने आया था। नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने के बाद उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया, हाईवे जाम किया और कई कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने इस्तीफे भी दिए थे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इसी नाराजगी का असर चुनावी परिणाम पर भी दिखाई दिया।

अब जबकि भाजपा के अधिकृत प्रत्याशी भी भितरघात के संकेत दे चुके हैं, ऐसे में संगठन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन कारणों की पहचान करना होगी, जिन्होंने पार्टी की चुनावी रणनीति को कमजोर किया। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संगठन के भीतर मंथन और संभावित कार्रवाई पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

Related Story

Trending Topics

img title
img title

Be on the top of everything happening around the world.

Try Premium Service.

Subscribe Now!