‘’एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा" को लेकर शिवराज सिंह का बड़ा सवाल, नौबत यहां तक क्यों आ गई

Edited By meena, Updated: 03 Oct, 2026 09:04 PM

shivraj singh s question regarding the dignity of women

उन्होंने लड़कों और माता-पिता से आत्म-मंथन करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आया जाए। मंत्री एक ऐसे प्रोग्राम में बोल रहे थे जहां ड्राइवरों के बच्चों को स्कॉलरशिप बांटी जा रही थी।

भोपाल : ‘’एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा" जैसे स्लोगन को लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने शनिवार को सवाल किया कि लड़कियां ऐसी स्थिति में क्यों पहुंच गईं कि उन्हें पुरुषों के प्रति अविश्वास जताने वाले नारे लिखने पड़ रहे हैं। उन्होंने महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान को लेकर समाज से आत्म-मंथन करने को कहा।

भोपाल में एक स्कॉलरशिप प्रोग्राम को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा, "नौबत यहां तक ​​क्यों आ गई कि मेरी बेटियों को ऐसे नारे लिखने पड़ रहे हैं?" उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रहे नारे - "एक कचौड़ी, दो समोसा, इन मर्दों का क्या भरोसा" - का ज़िक्र करते हुए कहा कि समाज को उन हालात पर गंभीरता से विचार करना चाहिए जिनकी वजह से ऐसी भावनाएं पैदा हुईं।

चौहान ने कहा कि महिलाओं और लड़कियों को कभी-कभी अपने परिचित लोगों से भी गलत व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि उनकी सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित करना सिर्फ़ उनके परिवारों की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की ज़िम्मेदारी है। उन्होंने कहा, "अगर हमारी बहनें और बेटियां पुरुषों पर भरोसा नहीं कर सकतीं, तो समाज और देश कैसे आगे बढ़ेगा?"

उन्होंने पुरुषों, लड़कों और माता-पिता से आत्म-मंथन करने और यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया कि महिलाओं के साथ सम्मान से पेश आया जाए। मंत्री एक ऐसे प्रोग्राम में बोल रहे थे जहां ड्राइवरों के बच्चों को स्कॉलरशिप बांटी जा रही थी।

स्कॉलरशिप स्कीम के तहत, 8वीं से 10वीं कक्षा में 60 प्रतिशत से ज़्यादा अंक लाने वाले छात्रों को सालाना 4,000 रुपये मिलेंगे, जबकि 11वीं और 12वीं कक्षा के छात्रों को 4,500 रुपये मिलेंगे।उन्होंने कहा कि 90 प्रतिशत से ज़्यादा अंक लाने वालों को 5,000 रुपये मिलेंगे। चौहान ने कहा कि वह कॉम्पिटिटिव एग्ज़ाम की कोचिंग और स्किल-डेवलपमेंट पहलों के ज़रिए भी बच्चों की मदद करेंगे।

उन्होंने बताया कि सरकारी नौकरियों की तैयारी में छात्रों की मदद के लिए उनके संसदीय क्षेत्र विदिशा में 'मामा कोचिंग क्लासेस' शुरू की गई हैं। उन्होंने कहा कि छात्रों को स्किल-डेवलपमेंट प्रोग्राम से जोड़ने की भी कोशिश की जाएगी ताकि वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी या अपना काम (सेल्फ़-एम्प्लॉयमेंट) शुरू कर सकें। इससे पहले, चौहान ने अपने संसदीय क्षेत्र विदिशा के सांची में 'रिसर्च सोसाइटी फॉर द स्टडी ऑफ़ डायबिटीज इन इंडिया' के 11वें सालाना सम्मेलन में हिस्सा लिया। उन्होंने कहा कि डायबिटीज स्वास्थ्य के लिए एक बढ़ती हुई चुनौती बन गई है और रोकथाम, जागरूकता, इलाज और रिसर्च पर ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया।

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