Edited By Himansh sharma, Updated: 29 Aug, 2025 10:41 AM

अब बात करते हैं पुलिस विभाग की, इसी क्षेत्र में देवसर अनुभाग के पुलिस अधिकारी का कार्यालय भी
सिंगरौली। (अंबुज तिवारी): मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले का देवसर क्षेत्र रेत चोरी का गढ़ बन चुका है.इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि प्रदेश भर में रेत के उत्खनन पर अक्टूबर तक रोक के बावजूद भी देवसर में रेत चोरी नहीं रुकी है.हैरत की बात है कि राजस्व और पुलिस विभाग रेत चोरों के आगे अपने हाथ खड़े कर चुका है.
रात के 9 बजते ही आसपास के गांवों में कई दर्जन ट्रैक्टर रेत चोरी के काम में लग जाते हैं.स्थानीय जानकार बताते हैं कि रेत चोरी यहां कम हुआ करती थी.4 से 5 वर्ष पहले एक थाना प्रभारी के आने के बाद युवाओं को खुला संरक्षण मिला तो धीरे - धीरे इस इलाके में रेत चोरी का सम्राज्य खड़ा हो गया.आसपास के गांवों के कई बेरोजगार युवाओं ने रेत चोरी को अपनी आजीविका का साधन बना लिया.स्थानीय नदियों से रेत चुराकर सरकार को करोड़ों का चूना लगाना इनके लिए आम बात हो गई.इसमें देवसर के राजस्व और पुलिस अधिकारियों से लेकर खनिज विभाग ने भी समय समय पर खूब सहयोग किया.कभी प्रशासन पर पैसे लेकर रेत चोरी करवाने की चर्चा हुई तो कभी जनप्रतिनिधियों पर रेत चोरी करवाने के आरोप लगे.मगर रेत का ये खेल नहीं रुका.
वर्तमान में यहां राजस्व विभाग के अनुविभागीय अधिकारी के रूप में अखिलेश कुमार सिंह पदस्थ हैं.यदि इतने बड़े पैमाने पर यहां रेत चोरी हो रही है तो शासन को करोड़ों का चूना भी लग ही रहा होगा.लेकिन राजस्व विभाग के इस अधिकारी की नीद नहीं टूटी.मतलब साहब ने भी शासन को करोड़ों का चूना लगाने में अपना योगदान बखूबी दिया.
अब बात करते हैं पुलिस विभाग की, इसी क्षेत्र में देवसर अनुभाग के पुलिस अधिकारी का कार्यालय भी है.यह क्षेत्र जियावन थाने के अंतर्गत आता है.रेत चोरी का पूरा खेल थाने के महज 5,6 किलोमीटर के दायरे में होता है. लेकिन पुलिस इन पर कार्यवाही करने को पाप समझती है.थाने में नए प्रभारी के आमद देते ही महीना फिक्स होने की चर्चाएं शुरू हो जाती है.एक वर्ष पहले यहां पदस्थ थाना प्रभारी ने तो थाने को ही रेत चोरों का अड्डा बना दिया था.जिसे बाद में लाइन अटैच कर दिया गया था.हालांकि 15 अक्टूबर तक प्रदेश भर में रेत उत्खनन प्रतिबंधित होता है.बावजूद इसके ऐसी तस्वीरें प्रशासन से कई सवाल पूंछ रही हैं.