56 परिवार झोपड़ी में रहने को मजबूर, नहीं मिला प्रधानमंत्री आवास, सरपंच सहित कई अधिकारियों से लगाई गुहार

Edited By meena, Updated: 02 Sep, 2023 12:33 PM

budhni 56 families did not get prime minister s residence

प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री तमाम मंचों से बड़े-बड़े वादे करते हैं। वहीं प्रधानमंत्री का लक्ष्य था कि 2022 तक कोई भी परिवार कच्चे मकान में नहीं रहेगा...

बुधनी(अमित शर्मा): प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री तमाम मंचों से बड़े-बड़े वादे करते हैं। वहीं प्रधानमंत्री का लक्ष्य था कि 2022 तक कोई भी परिवार कच्चे मकान में नहीं रहेगा, लेकिन मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री की विधान सभा और भाजपा जिला अध्यक्ष के गांव के पास की पंचायत के लगभग 56 परिवार अभी भी प्रधानमंत्री आवास योजना से कोसों दूर है, ओर टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर है।

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बता दे कि बुदनी के भेरूंदा जनपद क्षेत्र अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बरखेड़ी में आज भी कई परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। यहां कई ग्रामीण ऐसे हैं जिन्हें शासन की महत्वपूर्ण योजनाएं पीएम आवास का लाभ नहीं मिला है, जिसको लेकर ग्रामीण द्वारा सरपंच से लेकर कई अधिकारियों तक आवेदन निवेदन भी कर चुके है। लेकिन आज भी पीएम आवास को तरस रहे ओर झोपड़ी बनाकर रहने को मजबूर है। वहीं कुछ ग्रामीण ऐसे भी है जिनके झोपड़िया नाले के किनारे पर है जहां बारिश के दिनों में नाले का पानी उनके झोपड़ी से आर- पार हो जाता है, जिसके कारण उन्हें अपना झोपड़ा छोड कर कभी शासकीय स्कूल या अन्य स्थान पर पन्हा लेनी पड़ती है लेकिन गृहस्थी का सामना पानी की चपेट मे आने से खाने तक के लाले पड़ जाते है। 

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वही ग्राम पंचायत बरखेड़ी में निवास फूलवती बाई ने बताया कि बीते लगभग 10 वर्षो से यहां निवास कर रही हैं पहले गांव में निवास करते थे फिर गांव के बाहर आकर यहां निवास कर रहे हैं, लेकिन पीएम आवास का लाभ अभी तक नहीं मिला है हमारा मकान नाले के किनारे पर है और जब बारिश होती है तो नाले का पानी घर में आर-पार हो जाता है, वहीं इस टूटी फूटी झोपड़ी में छोटे बड़े मिलाकर नौ लोग निवास करते हैं, लेकिन जब बारिश होती है तो छत व अगल-बगल से पानी, रहना तो दूर, खाना-पीना भी दुश्वार हो जाता है और पनाह लेने के लिए गांव के शासकीय भवन या अन्य किसी रिश्तेदार के यहां जाना पड़ता है, लेकिन गृहस्थी का संसाधन पूरा तबाह हो जाता है। ऐसे में सरकार से गुहार है कि जल्द योजना का लाभ देकर पक्का मकान बनवाया जाए, ताकि परिवार के साथ सुखी जीवन यापन हो सके।

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वही बरखेड़ी पंचायत अंतर्गत ग्राम पिपलिया टप्पर का भी यही हाल है। यहां आदिवासी समाज के लगभग 20 परिवारों को पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला। बरखेड़ी पंचायत के पिपलिया टप्पर गांव में लगभग 20 परिवार निवास करते हैं जो आदिवासी समाज से आते है, यह भी टूटी-फूटी झोपड़ी में रहने को मजबूर है क्योंकि इन परिवारों को भी पीएम आवास योजना का लाभ नहीं मिला।

वही इस संबंध में ग्राम पंचायत बरखेड़ी के सरपंच प्रतिनिधि से पूछा तो बताया कि हमारे द्वारा बरखेड़ी एवं पिपलिया टप्पर के 56 परिवारों की पी एम आवास की सूची जनपद पंचायत कार्यालय भेरूंदा को भेजी जा चुकी है, लेकिन अभी तक किसी प्रकार का कोई आदेश वहां से नहीं दिया गया है, जिसके कारण आज भी यह 56 परिवार प्रधानमंत्री आवास विहीन है। वही जनपद पंचायत सीईओ प्रबल अर्जरिया ने बताया है कि अगर कोई पीएम आवास योजना से वंचित है, उन  सभी के नाम प्रतीक्षा सूची में जोड़े जा चुके हैं, शेष को मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास दिए जाएंगे।

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जहां भाजपा कार्यकर्ता व पदाधिकारी योजनाओं का बखान करते हैं और हर एक व्यक्ति को योजना दिलाने की बात करते हैं, वहीं जिला अध्यक्ष के ग्राम के नजदीक पंचायत मे ग्रामीणों को योजना का लाभ नहीं मिला। यह एक बड़ा सवाल है, अब देखना होगा कि कब तक इन आदिवासी ग्रामीणों को आवास का लाभ मिल पाता है।

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