हाईकोर्ट का बड़ा आदेश, चंदन नगर थाना प्रभारी को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने का फरमान, राजा दुबे से जुड़ा मामला

Edited By Desh sharma, Updated: 03 Dec, 2025 07:15 PM

chandan nagar police station incharge ordered to appear in court in indore

इंदौर हाई कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को 4 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जो पास्को केस के आरोपी संजय दुबे के बेटे राजा दुबे की ओर से दायर की गई थी।

इंदौर (सचिन बहरानी): इंदौर हाई कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को 4 दिसंबर को व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जो पास्को केस के आरोपी संजय दुबे के बेटे राजा दुबे की ओर से दायर की गई थी।

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प्राप्त जानकारी के अनुसार, कुछ दिनों पहले चंदन नगर पुलिस ने पास्को प्रकरण में संजय दुबे को गिरफ्तार किया था। मामला दर्ज होने के फौरन बाद संजय दुबे पुलिस गिरफ्त से फरार हो गए थे। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए राजा दुबे को हिरासत में ले लिया।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि पुलिस ने उन्हें बिना किसी स्पष्ट आधार के थाने में हथकड़ी लगाकर घंटों बैठाए रखा,जो उनकी वैधानिक स्वतंत्रता का उल्लंघन है।राजा दुबे ने अदालत में यह दावा भी किया है कि पुलिस ने उनसे जबरन पूछताछ की और उन्हें उस अपराध में शामिल करने का प्रयास किया,जिससे उनका कोई संबंध नहीं था।

याचिका में यह भी कहा गया है कि पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी की जानकारी समय पर परिजनों को नहीं दी, जो गिरफ्तारी की अनिवार्य प्रक्रिया के विपरीत है।मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने चंदन नगर थाना प्रभारी इंद्रमणि पटेल को निर्देश दिए कि वे व्यक्तिगत रूप से 4 दिसंबर को अदालत में प्रस्तुत हों।

साथ ही अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि पुलिस स्टेशन के भीतर लगे सीसीटीवी कैमरों की वह फुटेज भी पेश की जाए, जिसमें राजा दुबे को हिरासत में रखने की अवधि और स्थिति स्पष्ट होती हो।अदालत ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता के आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह पुलिसिया कार्रवाई गंभीर लापरवाही और अधिकारों के दुरुपयोग की श्रेणी में आएगी।

कोर्ट ने मामले को संवेदनशील मानते हुए पुलिस प्रशासन से पूरी पारदर्शिता और जिम्मेदारी प्रदर्शित करने की अपेक्षा जताई है। अब 4 दिसंबर को पुलिस अधिकारी की उपस्थिति और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हाई कोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा। यह मामला पुलिस की कार्यशैली और हिरासत संबंधी प्रक्रियाओं पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।

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