गेट खोला तो सामने खड़ी थीं कलेक्टर साहिबा, मोहल्ले वाले देखकर रह गए दंग!

Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Jan, 2026 12:22 PM

collector at doorstep shocks local residents

सीएम हेल्पलाइन पर की गई एक शिकायत ने उस वक्त सबको चौंका दिया

ग्वालियर. सीएम हेल्पलाइन पर की गई एक शिकायत ने उस वक्त सबको चौंका दिया, जब ग्वालियर की कलेक्टर रुचिका चौहान अचानक लक्ष्मण तलैया क्षेत्र के एक घर के दरवाज़े पर पहुंच गईं। मोहल्ले के लोग तब हैरान रह गए, जब कलेक्टर साहिबा ने न सिर्फ शिकायतकर्ता से बातचीत की, बल्कि घरों के भीतर जाकर बर्तनों में भरा पानी खुद देखकर उसकी गुणवत्ता की जांच की।

दरअसल, लक्ष्मण तलैया के नीचे डीपीएस स्कूल के पास गंदा पानी आने की शिकायत सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गई थी। शिकायत मिलते ही कलेक्टर रुचिका चौहान नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय के साथ मौके पर पहुंचीं। निरीक्षण से पहले ही पीएचई विभाग द्वारा समस्या का समाधान कर लिया गया था, लेकिन इसके बावजूद कलेक्टर ने स्थिति की सच्चाई खुद परखी।

निरीक्षण के दौरान घरों में रखा पानी साफ मिला, लेकिन कलेक्टर ने अधिकारियों को दो टूक शब्दों में चेतावनी दी कि शहर में कहीं भी गंदे पानी की शिकायत बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में जरा सी भी लापरवाही जनता के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है।

PunjabKesari1049 नलकूपों का क्लोरिनेशन, फिर भी सतर्क प्रशासन

नगर निगम के पीएचई अमले ने बीते चार दिनों में शहर के 1049 नलकूपों में क्लोरिनेशन, पानी की लाइनों के 192 लीकेज दुरुस्त, 15 पानी की टंकियों की सफाई और करीब 274 पानी के सैंपलों की गुणवत्ता जांच कराई है। इसके साथ ही सीवर व दूषित पानी से जुड़ी 311 शिकायतों का सीएम हेल्पलाइन पर निराकरण किया गया है। हालांकि, इसके बावजूद रोजाना 5 से 7 गंदे पानी की शिकायतें निगम तक पहुंच रही हैं।

पानी की टंकी का भी लिया जायजा

कलेक्टर रुचिका चौहान ने लक्ष्मण तलैया स्थित पानी की टंकी का निरीक्षण भी किया। अधिकारियों ने बताया कि टंकी की सफाई हाल ही में कराई गई है। इस पर कलेक्टर ने निर्देश दिए कि टंकी पर सफाई की तिथि स्पष्ट रूप से अंकित की जाए और भविष्य में हर छह माह में अनिवार्य रूप से सफाई सुनिश्चित हो।

कलेक्टर ने साफ कहा कि पेयजल और सीवर से जुड़ी शिकायतों के निराकरण में यदि कहीं भी ढिलाई पाई गई, तो जिम्मेदार अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई तय है।

अचानक निरीक्षण और सीधे जनता से संवाद ने प्रशासनिक गंभीरता का साफ संदेश दे दिया है — अब शिकायत सिर्फ कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर सुनी जाएगी।

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