कैमरों से घबराए कलेक्टर! डोंगरगढ़ में नवरात्रि बैठक में मीडिया पर रोक, पत्रकारों ने किया वॉकआउट

Edited By meena, Updated: 13 Mar, 2026 04:22 PM

collector scared of cameras media banned from navratri meeting in dongargarh

धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ में चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों को लेकर बुलाई गई प्रशासनिक बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बैठक के दौरान मीडिया को कवरेज से रोक दिया गया...

डोंगरगढ़ (हेमंत पाल) : धार्मिक नगरी डोंगरगढ़ में चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों को लेकर बुलाई गई प्रशासनिक बैठक उस समय विवादों में घिर गई जब बैठक के दौरान मीडिया को कवरेज से रोक दिया गया। कैमरे चालू होते ही कलेक्टर के हस्तक्षेप से माहौल ऐसा बना कि पत्रकारों ने बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया और मीटिंग हॉल से बाहर निकल गए।

दरअसल, विश्व प्रसिद्ध मां बम्लेश्वरी मंदिर में लगने वाले चैत्र नवरात्रि मेले की तैयारियों को लेकर प्रशासन ने ट्रस्ट समिति, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की बैठक बुलाई थी। यह बैठक सुबह 11 बजे निर्धारित थी, लेकिन बताया जा रहा है कि करीब तीन घंटे बाद अधिकारी बैठक में पहुंचे। बैठक में दुर्ग संभाग के आयुक्त सत्यनारायण राठौर, राजनांदगांव कलेक्टर जितेंद्र यादव और एसपी अंकिता शर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।

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बैठक शुरू होते ही पत्रकारों ने सामान्य प्रक्रिया के तहत वीडियो रिकॉर्डिंग और कवरेज शुरू की। लेकिन आरोप है कि इसी दौरान कलेक्टर जितेंद्र यादव ने मीडियाकर्मियों को वीडियो बनाने से रोक दिया। प्रशासन के इस रवैये को पत्रकारों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और पारदर्शिता के खिलाफ बताते हुए कड़ा विरोध जताया।स्थिति तब और गर्मा गई जब पत्रकारों ने इसे अपमानजनक मानते हुए बैठक का सामूहिक बहिष्कार कर दिया और हॉल से बाहर निकल आए।

लाखों श्रद्धालुओं के मेले की तैयारी पर सवाल

डोंगरगढ़ में हर साल चैत्र नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक विशाल धार्मिक मेला लगता है। यहां स्थित मां बम्लेश्वरी मंदिर में दर्शन के लिए देश-प्रदेश से लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षा, स्वास्थ्य, यातायात और भीड़ नियंत्रण को लेकर प्रशासनिक तैयारियां बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। स्थानीय मीडिया लंबे समय से मेले की व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन से सवाल पूछती रही है चाहे वह यातायात अव्यवस्था हो, श्रद्धालुओं की सुरक्षा हो या बुनियादी सुविधाओं की कमी। पत्रकारों का कहना है कि जब बैठक सार्वजनिक आयोजन से जुड़ी है और उसमें जनप्रतिनिधि भी मौजूद हैं, तो मीडिया कवरेज से परहेज समझ से परे है।

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उनका तर्क है कि ऐसे मामलों में मीडिया की मौजूदगी ही पारदर्शिता सुनिश्चित करती है।इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय पत्रकार संगठनों का कहना है कि अगर प्रशासन इस मामले पर स्पष्ट रुख नहीं अपनाता, तो आगे इसे लेकर विरोध और तेज हो सकता है। डोंगरगढ़ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन की तैयारियों के बीच पैदा हुआ यह विवाद अब प्रशासन और मीडिया के रिश्तों पर भी नई बहस छेड़ रहा है।

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