प्राइवेट स्कूलों की लूट पर लगाम, शिकायत पर तुरंत कार्रवाई के आदेश,कलेक्टर ने बनाई 8 जांच टीमें

Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Feb, 2026 12:23 PM

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मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही प्रशासन ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन ले लिया है।

MP News (हिमांश शर्मा): मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में नए शैक्षणिक सत्र से पहले ही प्रशासन ने प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर बड़ा एक्शन ले लिया है। भोपाल कलेक्टर कौशलेन्द्र विक्रम सिंह ने स्पष्ट आदेश जारी करते हुए कहा है कि कोई भी निजी स्कूल अब अभिभावकों पर किसी एक तय दुकान से यूनिफॉर्म, किताबें, कॉपियां या जूते खरीदने का दबाव नहीं बना सकेगा।

कलेक्टर के निर्देश के बाद जिलेभर में निगरानी के लिए 8 विशेष टीमों का गठन किया गया है, जो शिकायत मिलते ही संबंधित स्कूल प्रबंधन पर तुरंत कार्रवाई करेंगी।

एक दुकान से खरीदने की बाध्यता खत्म

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश में साफ कहा गया है कि प्राइवेट स्कूल किसी भी छात्र या पैरेंट्स को किसी विशेष दुकान से यूनिफॉर्म या किताबें खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। अगर किसी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन किया गया तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। नया शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले स्कूलों द्वारा अभिभावकों पर आर्थिक दबाव बनाने की शिकायतें सामने आ रही थीं, जिस पर प्रशासन ने यह कड़ा फैसला लिया है।

शिकायत मिलते ही होगी कार्रवाई

प्रत्येक अनुभाग में एसडीएम के नेतृत्व में पांच सदस्यीय टीम बनाई गई है। इन टीमों में तहसीलदार और सरकारी स्कूलों के प्राचार्य शामिल हैं। कलेक्टर ने निर्देश दिए हैं कि जैसे ही किसी अभिभावक की शिकायत मिले, तुरंत जांच कर दोषी स्कूल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

भोपाल में गठित 8 विशेष टीमें

कोलार – एसडीएम पी.सी. पांडेय

शहर वृत्त – एसडीएम दीपक पांडेय

एमपी नगर – एसडीएम एल.के. खरे

गोविंदपुरा – एसडीएम भुवन गुप्ता

टीटी नगर – एसडीएम अर्चना शर्मा

बैरागढ़ – एसडीएम रविशंकर राय

बैरसिया – एसडीएम आशुतोष शर्मा

हुजूर – एसडीएम विनोद सोनकिया

(हर टीम में तहसीलदार और शिक्षा विभाग के अधिकारी शामिल हैं)

पैरेंट्स के लिए बड़ी राहत

इस फैसले से भोपाल के हजारों अभिभावकों को राहत मिलेगी। अब स्कूल मनमाने तरीके से महंगी किताबें या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए मजबूर नहीं कर पाएंगे। अगर कहीं भी दबाव बनाया जाता है तो पैरेंट्स सीधे प्रशासन से शिकायत कर सकते हैं।

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