दिग्विजय सिंह ने 150 करोड़ के गेहूं घोटाले को लेकर CM मोहन को पत्र लिखकर मांगी कार्रवाई, कहा-कलेक्टर लापरवाही के लिए जिम्मेदार

Edited By Desh Raj, Updated: 08 May, 2026 08:40 PM

digvijaya singh writes to cm mohan regarding wheat scam

प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने रायसेन जिले में कथित 150 करोड़ रुपए के गेहूं घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

रायसेन(शिवलाल यादव): प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद दिग्विजय सिंह ने रायसेन जिले में कथित 150 करोड़ रुपए के गेहूं घोटाले को लेकर मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव को पत्र लिखकर पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने आरोप लगाया है कि रायसेन जिले के दिवटिया स्थित वेयरहाउसों में बड़ी मात्रा में रखा गेहूं घुन लगने और खराब रखरखाव के कारण सड़ गया।लेकिन इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। कलेक्टर इस लापरवाही के मामले में जिम्मेदार हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री द्वारा लिखे गए पत्र के सामने आने के बाद रायसेन जिले की राजनीति और प्रशासनिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर कांग्रेस पार्टी ने इसे प्रदेश का बड़ा खाद्यान्न घोटाला बताते हुए सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। वहीं जिला प्रशासन फिलहाल पूरे मामले में खुलकर कुछ भी बोलने से बचता नजर आ रहा है।

पत्र में पूर्व मुख्यमंत्री सिंह ने उल्लेख किया है कि किसानों की मेहनत से खरीदा गया लाखों क्विंटल पीडीएस का गेहूं वेयरहाउसों में लंबे समय तक अव्यवस्थित तरीके से पड़ा रहा। उचित रखरखाव और निगरानी के अभाव में गेहूं में घुन लग गया और वह मानव उपयोग के लायक नहीं बचा। आरोप है कि समय रहते अधिकारियों ने न तो गुणवत्ता परीक्षण कराया और न ही खराब हो रहे गेहूं को सुरक्षित स्थानों पर भिजवाने की व्यवस्था की।

बताया जा रहा है कि रायसेन जिले के दिवटिया क्षेत्र में स्थित कई निजी और अनुबंधित वेयरहाउसों में लंबे समय से खाद्यान्न भंडारण को लेकर शिकायतें मिल रही थीं। स्थानीय स्तर पर भी कई बार खराब गेहूं, रिसाव, नमी और रखरखाव की कमी को लेकर सवाल उठे, लेकिन जिम्मेदार विभागों ने ध्यान नहीं दिया। अब जब मामला राजनीतिक स्तर तक पहुंचा है तो जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल और गहरे हो गए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अपने पत्र में यह भी मांग की है कि पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एजेंसी से जांच कराई जाए तथा जिन अधिकारियों, वेयरहाउस संचालकों और संबंधित विभागीय कर्मचारियों की लापरवाही सामने आए। वास्तव में उनके खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाएं। उन्होंने कहा कि यह केवल आर्थिक नुकसान का मामला नहीं है बल्कि गरीबों और किसानों के हक के अनाज की बर्बादी का गंभीर विषय है।

कांग्रेस नेता एवं पूर्व सीएम सिंह का आरोप है कि रायसेन जिले में समर्थन मूल्य पर खरीदे गए गेहूं के भंडारण और परिवहन में लंबे समय से अनियमितताएं चल रही हैं। कई स्थानों पर रिकॉर्ड और वास्तविक भंडारण में अंतर की शिकायतें भी सामने आती रही हैं। विपक्ष का कहना है कि यदि समय रहते निगरानी और पारदर्शिता बरती जाती तो करोड़ों रुपए मूल्य का खाद्यान्न खराब होने से बचाया जा सकता था।

इधर प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि संबंधित विभागों से जानकारी जुटाई जा रही है। हालांकि आधिकारिक तौर पर किसी भी अधिकारी ने अभी तक 150 करोड़ रुपए के नुकसान की पुष्टि नहीं की है। लेकिन वेयरहाउसों में खराब गेहूं मिलने और गुणवत्ता संबंधी शिकायतों से इनकार भी नहीं किया जा रहा।

मामले को लेकर रायसेन जिले में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी जहां इसे बीजेपी सरकार की लापरवाही और भ्रष्टाचार का उदाहरण बता रही है। वहीं भाजपा नेताओं का कहना है कि तथ्य सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। हालांकि जनता के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि यदि वेयरहाउसों में अनाज खराब हो रहा था तो निगरानी करने वाले अधिकारी आखिर क्या कर रहे थे।

खाद्यान्न भंडारण व्यवस्था पर उठे इस विवाद ने एक बार फिर सरकारी खरीद, वेयरहाउस प्रबंधन और निगरानी तंत्र की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री डॉ यादव को भेजे गए इस पत्र के बाद सरकार क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो पाती है या नहीं। या फिर दोषियों को बचा लेगी।

 

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