Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Mar, 2026 05:59 PM
साल 2026 की शुरुआत के बाद से ही सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है।
भोपाल। साल 2026 की शुरुआत के बाद से ही सोने और चांदी की कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। अपने ऑल टाइम हाई से गिरकर दोनों धातुओं ने निवेशकों और आम खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है। जहां एक ओर ऊंचे भाव पर खरीद चुके लोग नुकसान को लेकर परेशान हैं, वहीं अब गिरावट के बाद खरीदारी को लेकर नई उम्मीद भी जगी है।
दो महीने में सोने में करीब 48,500 रुपये की गिरावट
Multi Commodity Exchange of India Ltd (MCX) पर 2 अप्रैल 2026 डिलीवरी वाला सोना इस सप्ताह 1,44,500 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। जबकि 29 जनवरी 2026 को इसने 1,93,096 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऑल टाइम हाई बनाया था। यानी करीब दो महीनों में सोना लगभग 48,596 रुपये तक सस्ता हुआ। हालांकि 23 मार्च को यह 1,29,595 रुपये तक भी गिरा था, जिसके बाद इसमें रिकवरी देखने को मिली।
चांदी में 2.11 लाख रुपये से ज्यादा की गिरावट
चांदी की बात करें तो MCX पर इसका भाव 2,27,750 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुआ। 29 जनवरी 2026 को चांदी ने 4,39,337 रुपये प्रति किलोग्राम का रिकॉर्ड स्तर छुआ था। इस तरह करीब दो महीने में चांदी लगभग 2,11,587 रुपये तक टूट चुकी है। 23 मार्च को यह 1,99,643 रुपये तक गिर गई थी, जिसके बाद इसमें भी तेजी लौटी है।
गिरावट के बाद खरीदारी बढ़ी
पिछले कुछ दिनों में निचले स्तरों पर सोने-चांदी में खरीदारी बढ़ी है। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार भू-राजनीतिक तनाव, डॉलर की मजबूती और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता जैसे कारणों से कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। वैश्विक स्तर पर Iran, Israel और United States से जुड़े तनाव, कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता और मजबूत डॉलर इंडेक्स भी सोने की चाल को प्रभावित कर रहे हैं। वहीं Federal Reserve का सख्त रुख भी बाजार पर दबाव बनाए हुए है।
एक्सपर्ट का नजरिया और प्राइस आउटलुक
विशेषज्ञों का कहना है कि सोना फिलहाल 4,300 डॉलर के आसपास सपोर्ट ले रहा है। यदि यह 4,600 डॉलर के ऊपर मजबूती से टिकता है, तो आगे 4,680 से 4,750 डॉलर तक और फिर 4,850 डॉलर तक जाने की संभावना बन सकती है। वहीं, अगर कीमत 4,300 डॉलर से नीचे फिसलती है, तो गिरावट तेज होकर 4,100–4,150 डॉलर तक जा सकती है। भारत में भी सोने के दाम अभी 1,40,000 रुपये के सपोर्ट जोन के ऊपर बने हुए हैं, जो यह संकेत देता है कि निचले स्तरों पर खरीदारी का रुझान कायम है।
क्या यही खरीदने का सही समय है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि मौजूदा स्तरों पर बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में एकमुश्त निवेश करने के बजाय चरणबद्ध (SIP जैसे) तरीके से खरीदारी करना बेहतर रणनीति हो सकती है। शादी या जरूरत के लिए खरीदने वाले लोग भी गिरावट के समय धीरे-धीरे खरीद कर औसत कीमत को संतुलित कर सकते हैं। कुल मिलाकर, सोने-चांदी में तेज गिरावट के बाद आई रिकवरी यह संकेत देती है कि बाजार में अभी भी असमंजस है, लेकिन लंबी अवधि के निवेशकों के लिए मौजूदा स्तर आकर्षक माने जा रहे हैं।