Edited By Himansh sharma, Updated: 19 Mar, 2026 08:20 PM

दुनिया में जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, निवेशक आमतौर पर सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने और चांदी की तरफ भागते हैं।
भोपाल: दुनिया में जब भी युद्ध जैसे हालात बनते हैं, निवेशक आमतौर पर सुरक्षित विकल्प के तौर पर सोने और चांदी की तरफ भागते हैं। लेकिन इस बार तस्वीर बिल्कुल उलट नजर आ रही है। ईरान युद्ध के बीच भारतीय सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में भारी गिरावट देखी जा रही है। खासकर चांदी में तो जबरदस्त गिरावट दर्ज हुई है, जिससे निवेशक भी हैरान हैं।
आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना-चांदी के दाम?
इस बार कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह है मजबूत होता अमेरिकी डॉलर। होर्मुज स्ट्रेट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें 60 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर करीब 110 डॉलर तक पहुंच गई हैं। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका गहराई है। ऐसे माहौल में निवेशक सोने-चांदी के बजाय डॉलर को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। मजबूत डॉलर और ऊंची ब्याज दरें हमेशा से सोने की कीमतों पर दबाव डालती रही हैं—और इस बार भी वही देखने को मिल रहा है।
निवेशकों का बदलता रुख
जहां पहले संकट के समय सोना ‘सेफ हेवन’ माना जाता था, वहीं अब डॉलर इस भूमिका में नजर आ रहा है। यही वजह है कि जियो-पॉलिटिकल तनाव के बावजूद सोना-चांदी सुस्त बने हुए हैं।
आगे क्या होगा? बढ़ सकते हैं दाम!
विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट स्थायी नहीं है। लंबी अवधि में सोने की कीमतों में 15-20% तक तेजी आ सकती है। हालांकि यह पूरी तरह अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर निर्भर करेगा—
अगर अमेरिका में मंदी आती है → सोना तेजी पकड़ सकता है
अगर अर्थव्यवस्था मजबूत रहती है → कीमतों पर दबाव बना रह सकता है
निष्कर्ष
फिलहाल बाजार में जो गिरावट दिख रही है, वह अस्थायी मानी जा रही है। लेकिन आने वाले समय में हालात बदल सकते हैं। निवेशकों को जल्दबाजी के बजाय सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है।