Edited By Himansh sharma, Updated: 12 Jun, 2026 12:41 PM

मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी घमासान अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है।
भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर जारी घमासान अब राष्ट्रीय स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन के नामांकन निरस्त होने के मामले में दिल्ली में कांग्रेस नेताओं ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस कर चुनाव आयोग और रिटर्निंग अधिकारी की कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े किए। वहीं, मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में होने से राजनीतिक और कानूनी हलकों की नजरें भी इस प्रकरण पर टिक गई हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में मीनाक्षी नटराजन ने स्पष्ट कहा कि उनके खिलाफ कोई भी लंबित आपराधिक मामला नहीं है, न ही उन्हें किसी दंडनीय अपराध में दोषी ठहराया गया है। उन्होंने कहा कि जिस आधार पर नामांकन रद्द किया गया, वह तथ्यात्मक और कानूनी रूप से गलत है। उनके अनुसार, उनके खिलाफ केवल एक लीगल नोटिस है, जिसकी पूरी जानकारी उन्होंने निर्वाचन आयोग को दिए गए दस्तावेजों में पहले ही दर्ज कर दी थी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब फॉर्म-26 में निजी शिकायत (प्राइवेट कम्प्लेंट) की जानकारी देने का कोई निर्धारित कॉलम ही नहीं है, तो उस सूचना को छिपाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है।
मामले पर अधिक टिप्पणी करने से बचते हुए नटराजन ने कहा कि चूंकि विवाद सुप्रीम कोर्ट के विचाराधीन है, इसलिए न्यायालय की गरिमा को ध्यान में रखते हुए वे कानूनी पहलुओं पर विस्तार से नहीं बोलेंगी। हालांकि उन्होंने दोहराया कि नामांकन निरस्त करने का फैसला पूरी तरह अनुचित है।
वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने चुनाव आयोग और प्रशासनिक अधिकारियों पर सीधा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि रिटर्निंग अधिकारी ने स्वयं स्वीकार किया है कि उनसे दबाव में गलती हुई है। सिंघार ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग सुप्रीम कोर्ट को भी वास्तविक तथ्यों से अवगत नहीं करा रहा और पूरे मामले में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनदेखी की जा रही है। उन्होंने कहा कि यह केवल एक उम्मीदवार का मामला नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया की लड़ाई है।
कांग्रेस ने इस मुद्दे को और आक्रामक ढंग से उठाने का फैसला किया है। मध्य प्रदेश से पहुंचे कांग्रेस विधायक दिल्ली में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार के नेतृत्व में राष्ट्रपति भवन तक मार्च निकालेंगे और पूरे मामले में हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
उधर, भाजपा लगातार अपने आरोपों पर कायम है। भाजपा नेताओं का कहना है कि मीनाक्षी नटराजन ने तेलंगाना की एक अदालत में लंबित कानूनी प्रकरण की जानकारी चुनावी हलफनामे में छिपाई, जिसके कारण रिटर्निंग अधिकारी ने नियमों के अनुसार उनका नामांकन खारिज किया।
अब सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी हैं। अदालत का फैसला केवल मीनाक्षी नटराजन के चुनावी भविष्य को ही नहीं, बल्कि नामांकन प्रक्रिया और निर्वाचन नियमों की व्याख्या पर भी दूरगामी असर डाल सकता है। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि आने वाला फैसला मध्य प्रदेश की राजनीति में नया मोड़ ला सकता है।