Edited By Himansh sharma, Updated: 10 Jun, 2026 11:39 AM

मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर सियासी संग्राम अब कानूनी और संवैधानिक बहस में बदल गया है।
भोपाल। मध्यप्रदेश राज्यसभा चुनाव की तीसरी सीट को लेकर सियासी संग्राम अब कानूनी और संवैधानिक बहस में बदल गया है। कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद जहां भाजपा इसे चुनावी पारदर्शिता की जीत बता रही है, वहीं कांग्रेस ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर गंभीर प्रहार करार दिया है। मामला अब निर्वाचन आयोग और न्यायपालिका की चौखट तक पहुंच गया है।कांग्रेस के चुनाव कार्य प्रभारी एवं वरिष्ठ अधिवक्ता जेपी धनोपिया ने नामांकन निरस्तीकरण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई, उसे भाजपा के प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने दर्ज कराया था, जबकि वे न तो राज्यसभा चुनाव के प्रत्याशी हैं और न ही मतदाता। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि उनकी आपत्ति को कानूनी आधार कैसे माना गया?
भाजपा का आरोप: आपराधिक प्रकरण छिपाया गया
भाजपा का आरोप है कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने नामांकन पत्र और शपथ पत्र में तेलंगाना में दर्ज एक आपराधिक प्रकरण की जानकारी छिपाई। भाजपा प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी के अनुसार हैदराबाद की अदालत में दर्ज एक परिवाद में नटराजन आरोपी के रूप में नामित हैं। उनका कहना है कि यदि नामांकन के समय यह मामला लंबित था तो इसकी जानकारी शपथ पत्र में देना अनिवार्य था।प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि कांग्रेस ने मतदाताओं से महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का प्रयास किया। भाजपा ने इस तथ्य को सामने लाकर चुनाव प्रक्रिया को कलंकित होने से बचाया है और निर्वाचन आयोग ने नियमों के अनुरूप निर्णय लिया है।
कांग्रेस का पलटवार: प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में
कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक साजिश बताते हुए पूरे घटनाक्रम पर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। चुनाव कार्य प्रभारी जेपी धनोपिया का कहना है कि भाजपा प्रत्याशी महेश केवट द्वारा दायर आपत्ति में यह मुद्दा शामिल ही नहीं था। उन्होंने दावा किया कि जिस शिकायत को आधार बनाया गया, वह ऐसे व्यक्ति द्वारा दी गई जो न चुनावी प्रक्रिया का पक्षकार है और न मतदाता।धनोपिया ने यह भी आरोप लगाया कि नामांकन जांच के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर के कक्ष में एक सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय न्यायाधीश की मौजूदगी को लेकर भी स्पष्टता नहीं दी गई। उनके अनुसार पूरी प्रक्रिया पारदर्शिता के मानकों पर खरी नहीं उतरती।
कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ा विवाद
राज्यसभा चुनाव का यह विवाद अब केवल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं है। संवैधानिक विशेषज्ञों और चुनावी कानून के जानकारों के बीच भी इस बात पर बहस शुरू हो गई है कि क्या किसी गैर-प्रत्याशी और गैर-मतदाता की शिकायत पर नामांकन निरस्त किया जा सकता है। कांग्रेस ने इस फैसले को चुनौती देने का संकेत दिया है, जबकि भाजपा अपने रुख पर कायम है।
चुनाव से बड़ा बन गया संवैधानिक सवाल
मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के बाद राज्यसभा की तीसरी सीट का मुकाबला राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया है। अब निगाहें निर्वाचन आयोग और अदालतों पर टिकी हैं, जहां यह तय होगा कि नामांकन निरस्तीकरण की प्रक्रिया कानूनी कसौटी पर कितनी टिकती है। फिलहाल यह मामला सिर्फ एक उम्मीदवार का नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया की वैधता और पारदर्शिता से जुड़े बड़े सवालों का केंद्र बन चुका है।