Edited By Vikas Tiwari, Updated: 02 Jul, 2026 08:47 PM

चुनाव आयोग ने दतिया विधानसभा उपचुनाव में तारीख की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी पार्टियां राजनीतिक तैयारी में जुट गई हैं। लेकिन भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी तो भाजपा औऱ कांग्रेस से भी दो कदम आगे चल रही है। चुनाव की घोषणा होते ही...
मध्यप्रदेश डेस्क (विकास तिवारी): चुनाव आयोग ने दतिया विधानसभा उपचुनाव में तारीख की घोषणा कर दी है। इसके साथ ही सभी पार्टियां राजनीतिक तैयारी में जुट गई हैं। लेकिन भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर की आजाद समाज पार्टी तो भाजपा औऱ कांग्रेस से भी दो कदम आगे चल रही है। चुनाव की घोषणा होते ही आजाद समाज पार्टी ने दामोदर यादव को दतिया से अपना उम्मीदवार बना दिया है। ऐसे में अब बड़े सवाल ये हैं कि क्या दामोदर यादव दतिया में जोर दिखा पाएंगे, या फिर यहां एक बार फिर लड़ाई भाजपा और कांग्रेस के बीच होगी?
दतिया में इस बार होगा त्रिकोणीय मुकाबला..
दामोदर यादव काफी लंबे समय से दतिया में उपचुनाव लड़ने का मन बना रहे थे, और वे लगातार दतिया में सक्रिय भी हैं। ऐसे में दतिया विधानसभा में इस बार मुकाबाल दो पार्टियों में नहीं बल्कि तीन पार्टियों की बीच होता दिख रहा है। वहीं जानकारों की मानें तो अगर दामोदर वोट बटोरने में कामयाब रहे तो इसका नुकसान कांग्रेस को हो सकता है, क्योंकि खुद दामोदर यादव कहते हैं कि वे लगातार बसपा और कांग्रेस के नेताओं कार्यकर्ताओं से मिल रहे हैं। दतिया में दामोदर की मजबूत मौजूदगी कांग्रेस के पारंपरिक वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। दामोदर किसान सम्मेलन और लगातार बैठकों के जरिए वे संगठन विस्तार में जुटे हैं। बड़ी बात ये भी है कि दतिया में 18 हजार यादव वोट हैं, सूत्रों के हवाले से बताया जा रहा है कि यादव वोट बैंक इस बार दामोदर के साथ जा सकता है।
दतिया में क्यों हो रहे हैं उपचुनाव?
दरअसल दतिया विधानसभा सीट कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद खाली हुई है। उन्हें दो वर्ष से अधिक की सजा मिलने पर नियम के अनुसार उनकी विधानसभा सदस्यता खुद समाप्त हो गई। इसके बाद मध्य प्रदेश विधानसभा सचिवालय ने सीट खाली घोषित कर निर्वाचन आयोग को इसकी सूचना भेज दी, और अब चुनाव आयोग ने ही दतिया में विधानसभा चुनावों की घोषणा कर दी है।
BJP से नरोत्तम मिश्रा हो सकते हैं दावेदार?
भाजपा की ओऱ से सबसे बड़ा नाम पूर्व ग्रह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का है। नरोत्तम मिश्रा लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। राजेंद्र भारती की सदस्यता समाप्त होने के बाद उन्होंने सामाजिक सम्मेलन और जनसंपर्क अभियान तेज कर दिया है। पिछले दो महीनों में वे एक दर्जन से अधिक कार्यक्रमों में शामिल हो चुके हैं। सूत्रों के मुताबिक दतिया के लिए बड़ी सरकारी घोषणाओं की तैयारी चल रही है। बताया जाता है कि 1 जून को उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से भी मुलाकात की थी। बीजेपी का दावा है कि पिछली चुनावी कमियों से सीख लेकर इस बार संगठन पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरेगा।
कांग्रेस से कई नेता टिकट की रेस में!
वहीं बात करें कांग्रेस की तो टिकट को लेकर कांग्रेस में कई दावेदार हैं। कांग्रेस में टिकट को लेकर अंदरूनी खींचतान दिखाई दे रही है। बताया जा रहा है कि राजेंद्र भारती अपने बेटे अनुज भारती के लिए टिकट की पैरवी कर रहे हैं। पिछली बार टिकट छोड़ने वाले अवधेश नायक खुद को मजबूत दावेदार मान रहे हैं। तो वहीं पूर्व विधायक घनश्याम सिंह के समर्थक भी सक्रिय हैं। हालांकि कांग्रेस जिलाध्यक्ष अशोक दांगी ने गुटबाजी से इनकार करते हुए कहा है कि टिकट का फैसला सर्वे रिपोर्ट के आधार पर किया जाएगा।
अब आपको बता दे कि दतिया में जातीय समीकरण क्या कहते हैं?
दतिया में यादव वोट लगभग 18 हजार हैं। 2023 के विधानसभा चुनाव में यादव मतदाताओं ने बड़ी संख्या में बीजेपी का साथ नहीं दिया था। इस बार दामोदर यादव के मैदान में होने से अनुमान है कि करीब 60 प्रतिशत यादव वोट आजाद समाज पार्टी की ओर जा सकते हैं, जिससे कांग्रेस को नुकसान हो सकता है। यहां कुशवाहा वोट भी लगभग 37 हजार हैं। इस सीट पर कुशवाहा समाज दो हिस्सों में बंटा माना जा रहा है। यदि इस समाज का प्रभावी उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरता है तो उसका नुकसान बीजेपी से अधिक कांग्रेस को होने की संभावना जताई जा रही है।
ब्राह्मण वोट किसके साथ?
वहीं यहां ब्राह्मण समाज का भी वोट लगभग 35 हजार से ज्यादा है। यदि कांग्रेस ब्राह्मण उम्मीदवार उतारती भी है, तब भी राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस वर्ग का बड़ा हिस्सा पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा के साथ बना रह सकता है, जिसका फायदा भाजपा को ही होगा।