घात लगाकर बैठे थे हमलावर... वन टीम पहुंची और शुरू हो गया खूनी खेल

Edited By Himansh sharma, Updated: 28 Jun, 2026 06:59 PM

khandwa forest team attacked 8 forest guards injured

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र की आम खुजली बीट में रविवार सुबह वन विभाग की टीम पर कथित अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया।

खंडवा (मुश्ताक मंसूरी): मध्य प्रदेश के खंडवा जिले के गुड़ी वन परिक्षेत्र की आम खुजली बीट में रविवार सुबह वन विभाग की टीम पर कथित अतिक्रमणकारियों ने जानलेवा हमला कर दिया। कक्ष क्रमांक 748-749 में गश्त पर गई स्पेशल फ्लाइंग स्क्वॉड पर पहले से घात लगाए बैठे लोगों ने गोफन, पत्थरों और लाठियों से हमला कर दिया। इस हमले में वनरक्षक ज्वाला सिंह, रोमांक नायक, शैलेंद्र यादव, राजेंद्र सिंह सक्तावत, राजेंद्र बागड़ी, प्रदीप बघेल, चंद्रपाल तोमर और राहुल लोधी सहित 8 से अधिक कर्मचारी घायल हो गए। इनमें कई को गंभीर चोटें आई हैं।

प्रशिक्षित नए वनरक्षकों की थी टीम

वन विभाग के अनुसार, वर्ष 2025 में भर्ती हुए 45 नवपदस्थ वनरक्षकों को प्रशिक्षण के बाद गुड़ी रेंज में तैनात किया गया था। यह विशेष दल अवैध अतिक्रमण रोकने और जंगल की सुरक्षा के लिए बनाया गया है। रविवार को नियमित गश्त के दौरान टीम पर सुनियोजित तरीके से हमला किया गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हमलावर पहले से जंगल में छिपे हुए थे और टीम के पहुंचते ही गोफन से बड़े-बड़े पत्थर बरसाने लगे।

अतिक्रमण हटाने के बाद बढ़ा था तनाव

गुड़ी रेंज में लंबे समय से वन भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें मिल रही थीं। हाल ही में वन विभाग और जिला प्रशासन ने संयुक्त अभियान चलाकर कई स्थानों से अतिक्रमण हटाया था। इसके बाद से वन अमले और कथित अतिक्रमणकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई थी। स्थानीय कर्मचारियों का कहना है कि इससे पहले भी वन विभाग की टीम पर हमले हो चुके हैं, लेकिन सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए।

'दो घंटे तक नहीं मिली मदद' का आरोप

घायल वन कर्मचारियों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सूचना देने के बावजूद गुड़ी रेंजर नरेंद्र पटेल घटनास्थल पर नहीं पहुंचे और खंडवा चले गए। कर्मचारियों का आरोप है कि वे करीब दो घंटे तक जंगल में घायल अवस्था में पड़े रहे। एक अन्य वन टीम मौके की ओर रवाना हुई, लेकिन जंगल में प्रवेश करने से पहले ही वापस लौट गई।डायल-112 की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस वाहन घटनास्थल पर पहुंचा, लेकिन घायल वन कर्मचारियों को अस्पताल ले जाने के बजाय हमलावर पक्ष के उन लोगों को साथ ले गया, जो अपने ही गोफन से घायल हुए थे। इसके चलते वन कर्मचारियों को समय पर चिकित्सा सुविधा नहीं मिल सकी।

सुरक्षा की मांग, जांच शुरू

घटना के बाद वन कर्मचारियों में भारी आक्रोश है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई, स्थायी पुलिस सुरक्षा और अभियान के दौरान पर्याप्त सुरक्षा बल उपलब्ध कराने की मांग की है। कर्मचारियों का कहना है कि पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिलने की स्थिति में जंगल में ड्यूटी करना मुश्किल होगा। वन विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने जंगलों में कानून-व्यवस्था और वन अमले की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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