Edited By Himansh sharma, Updated: 25 Jun, 2026 02:55 PM

मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों विशेषकर जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने एक अहम राजनीतिक और संगठनात्मक पहल की है।
भोपाल: मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों विशेषकर जल, जंगल और जमीन के अधिकारों को लेकर कांग्रेस ने एक अहम राजनीतिक और संगठनात्मक पहल की है। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के निर्देश पर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी हरीश चौधरी की ओर से एक उच्च स्तरीय विशेष समिति का गठन किया गया है, जिसे आदिवासी हितों से जुड़े ज्वलंत सवालों पर पार्टी की रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
आदिवासी मुद्दों पर फोकस के लिए नई रणनीति
यह समिति प्रदेश में आदिवासी समुदाय से जुड़े अधिकारों, वनाधिकार कानून (FRA) के क्रियान्वयन और जमीन से संबंधित विवादों की समीक्षा करेगी। इसके साथ ही आदिवासी अंचलों में बढ़ते भूमि विवादों और सामाजिक-राजनीतिक चुनौतियों पर कांग्रेस की भावी दिशा तय करने का काम भी इसी समिति के जिम्मे होगा। पार्टी का मानना है कि इस पहल के जरिए जमीनी स्तर पर आदिवासी वर्ग से संवाद को और मजबूत किया जाएगा तथा उनकी समस्याओं को सड़क से लेकर सदन तक प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा।
समिति में वरिष्ठ नेताओं को अहम जिम्मेदारी
इस विशेष समिति में प्रदेश के कई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेताओं को शामिल किया गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar को समिति में प्रमुख भूमिका दी गई है। उनके साथ पूर्व मंत्री Kamleshwar Patel, पूर्व नेता प्रतिपक्ष Ajay Singh तथा आदिवासी कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष Vikrant Bhuria को भी सदस्य बनाया गया है।
राजनीतिक संदेश भी स्पष्ट
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस का यह कदम केवल संगठनात्मक पुनर्गठन नहीं, बल्कि आदिवासी वोट बैंक को साधने की एक रणनीतिक कोशिश भी है। मध्य प्रदेश में आदिवासी आबादी के बड़े प्रभाव को देखते हुए पार्टी इस वर्ग के मुद्दों को अधिक आक्रामक तरीके से उठाने की तैयारी में दिखाई दे रही है। इस समिति के गठन के बाद प्रदेश की राजनीति में आदिवासी अधिकारों को लेकर सियासी सरगर्मी और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।