Edited By Desh Raj, Updated: 12 Jun, 2026 06:19 PM
रायपुर में कांग्रेस की एक अहम बैठक हुई है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित इस बैठक में अहम फैसले लिए गए हैं। यह बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में संपंन हुई।
(रायपुर): रायपुर में कांग्रेस की एक अहम बैठक हुई है। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन में आयोजित इस बैठक में अहम फैसले लिए गए हैं। यह बैठक प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज की अध्यक्षता में संपंन हुई। इस बैठक में आदिवासी हितों से लेकर हसदेव अरण्य विवाद और जल जमीन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई और 12 सूत्रीय प्रस्ताव पारित को पारित किया गया है। इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी के गठन का भी निर्णय लिया गया है।
आदिवासी कमेटी के गठन का अहम निर्णय
इस बैठक में निर्णय लिया गया है कि प्रदेश स्तरीय आदिवासी कमेटी का गठन किया जाएगा। ये कमेटी आदिवासी समुदाय से चर्चा करके उनके मुद्दों को लेकर रणनीति और प्लान तैयार करेगी। सभी प्रकार के मुद्दे इस कमेटी के माध्यम से उठाए जाएंगे।
12 बिंदुओं का प्रस्ताव किया गया पारित
कांग्रेस की इस बैठक में 12 बिंदुओं को लेकर प्रस्ताव पारित किया गया है।
पहला ये कि जनसंख्या के अनुपात में अनुसूचित जनजाति के लिए 32 प्रतिशत आरक्षण लागू हो, राजभवन में लंबित नवीन आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी करे सरकार।
Forest Rights Act के तहत वनाधिकार पट्टा आवंटित किया जाए।
हसदेव अरण्य, परसा ईस्ट केते बासन, केते एक्सटेंशन सहित नई खदानों में कोयला खनन, जैसी विभिन्न परियोजनाओं के लिए केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय द्वारा दी गई लाखों पेड़ों की कटाई और हसदेव के 1,742 हेक्टेयर वन भूमि के डायवर्जन की अनुमति
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संघर्ष की चपेट में आम आदिवासी निर्दाष होते हुए भी नक्सली हिंसा, पुलिस कार्रवाई से दूसरे पड़ोसी राज्यों में पलायन के लिए मजबूर हुए हैं उन्हें वापस लाया जाए,
नक्सली सहयोगी होने का आरोप लगाकर हजारों निर्दोष आदिवासियों को जेल भेजा गया है, अब जब पुनर्वास योजना के तहत नक्सलियों को मुख्यधारा में शामिल किया गया है तो ऐसे में सहयोगी होने के आरोपी उन निर्दोष आदिवासियों की भी रिहाई हो। 25 हजार से अधिक आदिवासियों के खिलाफ जारी स्थायी एवं अस्थायी वारंट रद्द किया जाए।
आदिवासी समुदाय के प्राचीन परंपराओं की रक्षा सुनिश्चित करें संविधान की पांचवीं अनुसूची (Fifth Schedule) के तहत अपने स्वशासन, ग्राम सभा की सर्वोच्चता और पारंपरिक कानूनों पैसा कानून और वन अधिकार अधिनियम के प्रावधानों की रक्षा करे।
समान नागरिक संहिता के प्रस्तावित कानूनों में आदिवासी समाज को छूट मिले।
स्थानीय रोजगार और सरकारी भर्ती में आदिवासियों को आरक्षण मिले।
पेसा कानून (PESA Act) का कड़ाई से पालन हो, पांचवीं अनुसूची के क्षेत्र बस्तर और सरगुजा में ग्राम सभा के अधिकारों को बाइपास करना बंद करें सरकार।
जनगणना 2026-2027 में आदिवासियों की स्पष्ट पहचान के लिए अलग से कालम निर्धारित किया जाए ताकि विशेष पहचान और संख्या भी सामने आये।
अनुसूचित क्षेत्रों में पंचायत राज अधिनियम का कड़ाई से पालन हो। किसी भी विकास परियोजना या ज़मीन अधिग्रहण के लिए ग्राम सभा की सहमति की अनिवार्यता का प्रावधान का पालन सुनिश्चित हो।
आदिवासियों को प्राप्त विशेष संवैधानिक अधिकारों का संरक्षण सुनिश्चित हो। संविधान की पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को निष्ठापूर्वक लागू करे। लिहाजा इस बैठक में अहम प्रस्ताव पर चर्चा हुई है।