राज्य सरकार का बड़ा फैसला, महिला पार्षदों-अध्यक्षों के पति और रिश्तेदार नहीं बन सकेंगे प्रतिनिधि, अधिसूचना जारी

Edited By Vandana Khosla, Updated: 11 Aug, 2026 10:42 AM

major decision by the state government husbands and relatives of female

रायपुरः छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा अन्य निकट पारिवारिक सदस्यों या नातेदारों को उनके प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामित किए जाने पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं...

रायपुरः छत्तीसगढ़ सरकार ने नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा अन्य निकट पारिवारिक सदस्यों या नातेदारों को उनके प्रतिनिधि अथवा समन्वयक के रूप में नामित किए जाने पर रोक लगा दी है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने इस संबंध में छत्तीसगढ़ राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित कर नियमों में संशोधन किया है। राज्य सरकार ने छत्तीसगढ़ नगरपालिक (लोकसभा सदस्य, राज्य विधानसभा सदस्य या राज्यसभा सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन हेतु अहर्ताएं) नियम, 2022 में संशोधन करते हुए नियम तीन के बाद नया नियम चार जोड़ा है।

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नए प्रावधान के अनुसार, 'निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों के पारिवारिक सदस्यों के प्रतिनिधियों के रूप में नामनिर्देशन पर प्रतिषेध - किसी भी नगरीय निकाय में, निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के पति, पुत्र, पुत्री, भाई, बहन अथवा किसी अन्य निकट पारिवारिक, सदस्य या नातेदार को उनके परोक्ष प्रतिनिधि अथवा समन्वयक व्यक्ति के रूप में नामनिर्दिष्ट अथवा नियुक्त नहीं किया जाएगा।' यह संशोधन छत्तीसगढ़ नगरपालिक निगम अधिनियम, 1956 तथा छत्तीसगढ़ नगरपालिका अधिनियम, 1961 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए किया गया है। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने आज कहा कि पति, पुत्र, भाई, बहन सहित निकट परिवारजनों पर रोक लगाई गई है।

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लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा के सदस्य द्वारा प्रतिनिधि के रूप में नाम निर्देशन नियम, 2022 को संशोधित किया गया। यह छत्तीसगढ़ राजपत्र में प्रकाशित हुआ है। उन्होंने कहा कि लंबे समय से परिवारजनों के हस्तक्षेप की शिकायत मिल रही थी। कई मामलों में वे बैठकों में शामिल होते थे और कभी-कभी हस्ताक्षर भी कर देते थे। अब पारिवारिक नियुक्ति पर रोक लगा दी गई है। यदि ऐसी नियुक्ति की जाती है, तो वह मान्य नहीं होगी और नियुक्ति करने पर कारर्वाई होगी।

साव ने कहा कि महिला आरक्षण महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए यह फैसला लिया गया, लेकिन लगातार अलग-अलग विभागों और आयोगों से शिकायतें प्राप्त हो रही थीं। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए यह ऐतिहासिक कदम उठाया गया है। सरकार के इस संशोधन के बाद नगरीय निकायों में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधियों की जगह उनके परिजनों के माध्यम से कार्य करने या बैठकों में प्रतिनिधित्व करने की व्यवस्था पर प्रभावी रोक लग जाएगी।

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